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History of rajasthan

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राजस्थान के प्रमुख संत एवं उनके सम्प्रदायों का विस्तृत विवरण – दादू दयाल, जाम्भोजी, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, जैन धर्म, सूफी परंपरा, समाज सुधार और धार्मिक आंदोलन की संपूर्ण जानकारी। 

राजस्थान के प्रमुख संत एवं उनके सम्प्रदायों का विस्तृत विवरण – दादू दयाल, जाम्भोजी, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, जैन धर्म, सूफी परंपरा, समाज सुधार और धार्मिक आंदोलन की संपूर्ण जानकारी।


श्रेणी: धर्म, संस्कृति, राजस्थान इतिहास
कीवर्ड्स: राजस्थान के संत, सम्प्रदाय, भक्ति आंदोलन, सूफी संत, जैन धर्म, समाज सुधार, विश्नोई सम्प्रदाय, दादू दयाल, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती


राजस्थान की पावन भूमि संतों, समाज सुधारकों और धार्मिक आंदोलनों की जननी रही है। यहाँ के संतों ने न केवल ईश्वर भक्ति का प्रचार किया, बल्कि समाज सुधार, पर्यावरण संरक्षण, जातिवाद विरोध और मानवता का संदेश भी दिया।

भक्ति आंदोलन से लेकर सूफी परंपरा और जैन धर्म तक, राजस्थान के संतों की शिक्षाओं ने भारतीय संस्कृति को नई दिशा दी।


🕉️ प्रमुख हिंदू संत एवं उनके सम्प्रदाय

🔶 संत लालगिरी

  • सम्प्रदाय: अलखिया सम्प्रदाय
  • प्रधान पीठ: बीकानेर, सुलाखिया (चुरु)
  • मुख्य उपदेश: “अलख स्तुती”
  • “अलख” शब्द निराकार ईश्वर की साधना का प्रतीक है।
  • इनके अनुयायी ‘अलखिया’ कहलाते हैं, जो सादगी, ध्यान और तप में विश्वास रखते हैं।


🔶 संत नवलदास जी

  • सम्प्रदाय: नवल सम्प्रदाय
  • प्रधान पीठ: जोधपुर
  • ग्रंथ: “नवल वाणी (नवलेश्वर अनुभव वाणी)”
  • इनका दर्शन आत्मबोध और सरल जीवन की प्रेरणा देता है।


🔶 संत चरणदास जी

  • संस्थापक: चरणदासी सम्प्रदाय
  • प्रधान पीठ: दिल्ली
  • जन्म: अलवर
  • गुरु: शुकदेव मुनि
  • कर्मस्थली: दिल्ली
  • मुख्य नियम: 42 नियम
  • इन्होंने सामाजिक सुधार, शुद्ध आचरण और गुरु-भक्ति पर बल दिया।


🔶 संत जसनाथ जी

  • संस्थापक: जसनाथी सम्प्रदाय
  • प्रधान पीठ: कतरियासर (बीकानेर)
  • मुख्य नियम: 36
  • मुख्य आकर्षण: अग्नि नृत्य
  • धार्मिक स्थल: कतरियासर, लिखमादेसर, बमल, पुरनासर (बीकानेर), पाँचला (नागौर)
  • अनुयायी: जाट (“सिह”)
  • इनका सम्प्रदाय पर्यावरण, अग्नि साधना और सामाजिक एकता का प्रतीक है।


🔶 दादू दयाल जी

  • सम्प्रदाय: दादूपंथ
  • प्रधान पीठ: नरैणा (जयपुर)
  • जन्म: अहमदाबाद
  • कर्मस्थली: जयपुर
  • उपदेश: “दूढाड़ी बोली” में
  • रचनाएँ: ‘दया बोध’, ‘बहाम’
  • मुख्य कार्य: गौहत्या पर प्रतिबंध हेतु आंदोलन, अकबर से भेंट
  • अनुयायी: 152 शिष्य
  • दादूजी ने सर्वधर्म समभाव, प्रेम और जातिवाद विरोध का संदेश दिया।


🔶 संत पींपा

  • भक्ति आंदोलन के प्रथम संत
  • गुरु: रामानंद
  • स्थान: गागरोण दुर्ग (झालावाड़)
  • ग्रंथ: “जोग चिंतामणि”, “पीपा सखी”
  • पूज्य समुदाय: दर्जी समाज
  • गुफा: केकड़ी, पिपां गुफा
  • इनकी साधना ने भक्ति आंदोलन की नींव रखी।


🔶 संत धन्ना जी

  • गाँव: धुआ (टोंक)
  • गुरु: रामानंद
  • भक्ति आंदोलन के जनक
  • प्रसिद्ध आरती: “धन्नाजी की आरती”
  • स्मारक: चारू गाँव (फागी, जयपुर)
  • सच्चे भक्ति भाव से परमात्मा प्राप्ति के उपदेशक।


🔶 संत जाम्भोजी (विश्नोई सम्प्रदाय)

  • संस्थापक: जाम्भोजी
  • नियम: 29
  • प्रधान पीठ: मुकाम (बीकानेर)
  • प्रमुख आंदोलन: पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा
  • अमृता देवी बलिदान: वृक्ष रक्षा हेतु प्रसिद्ध घटना
  • मुख्य आयोजन: वृक्ष मेला (भाद्रपद दशमी)
  • विश्नोई सम्प्रदाय विश्व का पहला पर्यावरणीय आंदोलन माना जाता है।


🔶 रामस्नेही सम्प्रदाय

  • संस्थापक: संत रामचरण जी
  • प्रधान पीठ: शाहपुरा (भीलवाड़ा)
  • मुख्य आयोजन: फुलडोल उत्सव (चैत्र कृष्ण एकम-पंचमी)
  • विशेषता: मूर्तिपूजा विरोध, रामद्वारा उपासना परंपरा
  • सगुण-निर्गुण दोनों भावों का समन्वय।


🌸 सगुण और निर्गुण संत

प्रकारप्रमुख संतविशेषता
सगुण संतमीराबाई (मेड़ता/चितौड़), करमाबाई (अलवर), राणा बाई (हरनावा), गवरीबाई (डूंगरपुर)ईश्वर को साकार रूप में मानना, कठिन भक्ति, रचनाएँ, मीरा महोत्सव
निर्गुण संतकबीर, रैदास, सुन्दरदास, रज्जब, गरीबदास, मावजीजातिवाद विरोध, निराकार भक्ति, समाज सुधार की प्रेरणा

⚙️ शैव सम्प्रदाय

  • प्रमुख शाखाएं: शैव, पाशुपत, कालदमन, कापालिक, नाथ सम्प्रदाय
  • नाथ सम्प्रदाय: गोरखनाथ, मत्स्येन्द्रनाथ, भर्तृहरि, जालंधरनाथ
  • मुख्य केंद्र: महामंदिर (जोधपुर)
  • मुख्य साधना: योग, ध्यान, तप
  • नाथ साधु समाज योग और आत्मानुभव के माध्यम से मुक्ति का मार्ग बताते हैं।


🌼 वैष्णव सम्प्रदाय

  • प्रमुख मत: रामानुजाचार्य, वल्लभाचार्य, निम्बार्काचार्य, गौड़ीय सम्प्रदाय
  • मुख्य स्थल:

  • नाथद्वारा (पुष्टिमार्ग, वल्लभ सम्प्रदाय)
  • सलेमाबाद (अजमेर – निम्बार्काचार्य)
  • वृंदावन (गौड़ीय सम्प्रदाय)
  • गालव तीर्थ (जयपुर – रामानुजाचार्य)
  • मुख्य उत्सव: अन्नकूट महोत्सव (नाथद्वारा)


🪶 राजस्थान में जैन धर्म

🔹 सम्प्रदाय एवं शाखाएँ

  1. श्वेतांबर सम्प्रदाय:

  • सफेद वस्त्रधारी, मूर्तिपूजक।
  • प्रमुख स्थल: रणकपुर जैन मंदिर, आमेर जैन मंदिर।

 2.दिगंबर सम्प्रदाय:

  • नग्न साधु, कठोर तप, संयम और ध्यान।
  • प्रमुख स्थल: डूंगरपुर, सिरमारी, बीकानेर।


 3.तेरापंथ सम्प्रदाय:

  • संस्थापक: आचार्य भीषणजी
  • प्रमुख आचार्य: आचार्य तुलसी, आचार्य महाश्रमण
  • आंदोलन: “अनुव्रत आंदोलन” – नैतिकता, संयम, समाज सुधार।

🔹 प्रमुख जैन तीर्थ

  • रणकपुर जैन मंदिर (1444 स्तंभों वाला अद्भुत स्थापत्य)
  • आमेर जैन मंदिर (जयपुर)
  • सिरथल, डूंगरपुर, गागरोण, बीकानेर


🔹 जैन संत एवं योगदान

  • आचार्य तुलसी, आचार्य महाश्रमण – संयम, नैतिकता, शिक्षा, अहिंसा।
  • “अनुव्रत आंदोलन” – समाज सुधार और नैतिक जीवन शैली का प्रचार।
  • शाकाहार, जीवदया और अहिंसा का प्रसार।


☪️ प्रमुख मुस्लिम संत व दरगाहें

🌙 ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (गरीब नवाज) – अजमेर

  • जन्म: संजरी (ईरान)
  • प्रचार: सूफी मत, मानवता और प्रेम का संदेश
  • दरगाह: अजमेर शरीफ – बुलंद दरवाजा, जन्नती दरवाजा, शाहजहानी मस्जिद
  • उर्स: हर वर्ष विशाल मेला
  • संदेश: सर्वधर्म समभाव, भाईचारा और करुणा।


🌙 हमीददीन नागौरी

  • पूरा नाम: हमीदुद्दीन चिश्ती
  • गुरु: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती
  • दरगाह: नागौर
  • मत: सूहरावर्दी सुफी परंपरा
  • संदेश: सेवा, करुणा, समानता

🌙 अन्य प्रमुख दरगाहें

  • बीकानेर: सूफी संतों की मजारें
  • डूंगरपुर, जालौर, करौली, रणथंभौर, गागरोण, प्रतापगढ़: प्रसिद्ध सूफी दरगाहें
  • गागरोण (झालावाड़): मियां बप्पा की दरगाह


🌙 दरगाहों से जुड़ी परंपराएँ

  • उर्स: संत की बरसी पर मेला, कव्वाली, भंडारा
  • चादर चढ़ाना: मन्नत और श्रद्धा की परंपरा
  • सूफी संगीत: कव्वाली और इस्लामी आध्यात्मिक गीत
  • मलंग-संतों का आगमन: भारतभर से श्रद्धालुओं का आगमन


🌙 सामाजिक महत्व

  • दरगाहें प्रेम, भाईचारा और सर्वधर्म समभाव की प्रतीक हैं।
  • ये स्थान धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक एकजुटता का संदेश देती हैं।


🌳 धार्मिक आंदोलन, मेले और समाज सुधार

  • जसनाथ सम्प्रदाय: अग्नि नृत्य
  • विश्नोई सम्प्रदाय: वृक्ष मेला, पर्यावरण संरक्षण
  • रामस्नेही सम्प्रदाय: फुलडोल उत्सव
  • पुष्कर मेला, मीरा महोत्सव, गागरोण चैत्र पूर्णिमा: प्रमुख धार्मिक आयोजन


📚 साहित्य और ग्रंथ

  • प्रमुख ग्रंथ:
‘नवल वाणी’, ‘रज्जब वाणी’, ‘दया बोध’, ‘सहज प्रकाश’, ‘कामाबेली ग्रंथ’,
‘चोपड़ा ग्रंथ’, ‘अनुभावाणी’, ‘पीपा सखी’, ‘ज्ञान समुद्र’, ‘अक्तसागर’।
  • जाम्भवाणी: 120 सबद
  • चोपड़ा ग्रंथ: मावजी की 5 भागों की कृति – अक्तसागर, मेधसागर, प्रेमसागर, रतनसागर, सामजागर (दिवाली पर दर्शन हेतु)।


🌺 समाज सुधार और उपदेश

  • मूर्तिपूजा विरोध
  • विवाह-विरोधी आंदोलन (संयम जीवन)
  • महिला सशक्तिकरण
  • जातिवाद और रूढ़िवाद का विरोध
  • पशु-पक्षी एवं पर्यावरण संरक्षण
  • शिक्षा, समानता, सर्वधर्म समभाव का प्रचार


🌼 निष्कर्ष

राजस्थान के संतों और सम्प्रदायों ने भारतीय समाज को भक्ति, समानता, प्रेम, और नैतिकता की दिशा दी।
इन संतों ने अपने उपदेशों से समाज में सद्भाव, पर्यावरण जागरूकता, शिक्षा और मानवता का प्रकाश फैलाया।
आज भी इनके सिद्धांत समाज में प्रेरणा और एकता के प्रतीक हैं।

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