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मुगलकालीन कला एवं संस्कृति: स्थापत्य, साहित्य और इतिहास का पूरा निचोड़

मुगलकालीन कला एवं संस्कृति: स्थापत्य, साहित्य और इतिहास का पूरा निचोड़

मुगलकालीन कला एवं संस्कृति: स्थापत्य, साहित्य और इतिहास का पूरा निचोड़




क्या आप जानते हैं कि ताजमहल के बनने से पहले ही उसकी रूपरेखा तैयार हो चुकी थी? या कि मुगल काल में एक ऐसी भी इमारत है जिसे 'ताजमहल की फुहड़ नकल' कहा जाता है?

भारतीय इतिहास में मुगल काल (Mughal Era) न केवल युद्धों के लिए, बल्कि अपनी भव्य स्थापत्य कला (Architecture) और समृद्ध साहित्य के लिए भी जाना जाता है। आज के इस विशेष लेख में हम बाबर से लेकर औरंगजेब तक की कलात्मक यात्रा और उनकी महान कृतियों का विस्तृत अध्ययन करेंगे।


1. मुगल स्थापत्य: इण्डो-पर्शियन शैली का संगम

मुगल स्थापत्य कला का इतिहास बाबर से प्रारंभ होता है और शाहजहाँ के काल में अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँचता है। विद्वानों ने इस विशिष्ट शैली को इण्डो-पर्शियन शैली की संज्ञा दी है।

बाबर और हुमायूँ: नींव का दौर

  • बाबर: पानीपत की काबुली मस्जिद और रुहेलखण्ड की सम्भल मस्जिद के साथ मुगल निर्माण की शुरुआत की।

  • हुमायूँ: दिल्ली में दीनपनाह नगर (पाँचवीं दिल्ली) की स्थापना की।

अकबर: प्रयोगों का काल

अकबर ने भारतीय और ईरानी शैलियों का अद्भुत मेल किया।

  • हुमायूँ का मकबरा (दिल्ली): इसे 'ताजमहल का पूर्वगामी' कहा जाता है। यह दोहरे गुम्बद और चारबाग पद्धति का भारत में पहला सफल उदाहरण है।

  • फतेहपुर सीकरी: यहाँ का बुलंद दरवाजा (गुजरात विजय का प्रतीक) और जोधाबाई का महल स्थापत्य के बेहतरीन नमूने हैं। पर्सी ब्राउन ने 'तुर्की सुल्ताना की कोठी' को 'स्थापत्य कला का मोती' कहा है।


2. शाहजहाँ: स्थापत्य कला का 'स्वर्णकाल'

शाहजहाँ का शासनकाल भारतीय इतिहास में वास्तुकला का स्वर्णिम युग माना जाता है।

  • ताजमहल (आगरा): मुमताज महल की स्मृति में निर्मित। इसके मुख्य वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी थे।

  • लाल किला (दिल्ली): दिल्ली के सातवें नगर शाहजहाँबाद की स्थापना और भव्य जामा मस्जिद का निर्माण इसी काल की देन है।


3. मुगलकालीन प्रमुख उद्यान (Mughal Gardens)

मुगलों को प्रकृति से प्रेम था, इसलिए उन्होंने कई सुंदर उद्यानों का निर्माण कराया:

उद्यान का नामनिर्मातास्थान
आराम बागबाबरआगरा
शालीमार बागजहाँगीरश्रीनगर
शालीमार बागशाहजहाँलाहौर
पिंजौर का बागऔरंगजेबहरियाणा

4. साहित्य और कला की प्रमुख उपाधियाँ

मुगल शासकों ने विद्वानों और कलाकारों को कई महत्वपूर्ण उपाधियों से नवाजा:

  • तानसेन: कण्ठाभरण वाणी विलास

  • उस्ताद मंसूर (चित्रकार): नादिर-उल-असरार

  • अबुल हसन: नादिर-उद्-जमा

  • हीरविजय सूरि (जैन विद्वान): जगत गुरु


5. महत्वपूर्ण मुगलकालीन साहित्य (Mughal Literature)

परीक्षा की दृष्टि से ये पुस्तकें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

  1. बाबरनामा: बाबर की आत्मकथा (तुर्की भाषा)।

  2. हुमायूँनामा: गुलबदन बेगम (हुमायूँ की बहन)।

  3. अकबरनामा (आइन-ए-अकबरी): अबुल फजल।

  4. मुन्तखब-उत-तवारीख: अब्दुल कादिर बदायूँनी।

  5. पादशाह नामा: अब्दुल हमीद लाहौरी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. मुगल काल का 'स्वर्णकाल' किसके शासन को कहते हैं?

उत्तर: स्थापत्य कला की दृष्टि से शाहजहाँ के काल को और चित्रकला की दृष्टि से जहाँगीर के काल को।

Q2. 'पिएट्राड्यूरा' (Pietra Dura) क्या है?

उत्तर: संगमरमर के पत्थर पर कीमती रत्नों और रंगीन पत्थरों से की गई जड़ाऊ नक्काशी। इसका प्रथम प्रयोग एत्माद्-उद्-दौला के मकबरे में हुआ था।

Q3. 'द्वितीय ताजमहल' किसे कहा जाता है?

उत्तर: औरंगाबाद में स्थित औरंगजेब की पत्नी राबिया-उद्-दुर्रानी के मकबरे (बीबी का मकबरा) को।


निष्कर्ष:

मुगलकालीन कला केवल पत्थर और ईंटों का ढांचा नहीं है, बल्कि यह उस युग की सांस्कृतिक समृद्धि और शिल्पकारों के कौशल का जीवंत प्रमाण है। चाहे वह बुलंद दरवाजे की भव्यता हो या ताजमहल की कोमलता, ये आज भी विश्व को अचंभित करते हैं। 

🏆 मुगलकालीन कला एवं संस्कृति क्विज़

मुगल प्रशासन (Mughal Administration): स्वरूप, संरचना और प्रमुख विशेषताएँ

 मुगल प्रशासन (Mughal Administration): स्वरूप, संरचना और प्रमुख विशेषताएँ

मुगल काल में परगना प्रशासन के प्रमुख अधिकारी शिकदार, आमिल और कानूनगो की भूमिका




मुगल प्रशासन भारतीय इतिहास की सबसे व्यवस्थित, केन्द्रीकृत और सुदृढ़ प्रशासनिक प्रणालियों में से एक माना जाता है। यह शासन व्यवस्था विशुद्ध रूप से विदेशी नहीं थी, बल्कि यह अरबी, फारसी तथा भारतीय परंपराओं का एक मिला-जुला स्वरूप थी।

मुगल प्रशासन की प्रमुख विशेषताएँ

  • जनक: मुगल प्रशासनिक मॉडल का वास्तविक संस्थापक अकबर को माना जाता है।

  • पेपर स्टेट (Paper State): प्रशासनिक कार्यों में कागजों और लिखित अभिलेखों के अत्यधिक प्रयोग के कारण इसे "पेपर स्टेट" कहा गया।

  • धार्मिक आधार: मुगलकालीन राजस्व सिद्धान्त शरीयत पर आधारित था।

  • दैवीय सिद्धान्त (Divine Theory): 'आइने-अकबरी' के अनुसार बादशाह ईश्वर का प्रतिनिधि है। एक व्यक्ति में हजारों गुणों का समावेश होना ही दैवीय सिद्धान्त कहलाता है।

  • निरंकुशता: यह प्रशासन पूरी तरह केन्द्रीकृत था और यह खलीफा की सत्ता को स्वीकार नहीं करता था।


बादशाह की स्थिति और मज़हर (1579)

बाबर ने 1507 ई. में 'मिर्ज़ा' की उपाधि त्यागकर 'बादशाह' (पादशाह) की उपाधि धारण की। दिल्ली सल्तनत के सुल्तानों के विपरीत, मुगल शासक स्वतंत्र थे।

अकबर ने 1579 ई. में मज़हर की घोषणा की, जिससे धार्मिक विवादों में अकबर का निर्णय सर्वोपरि हो गया।


प्रशासनिक विभाजन: केन्द्र से गाँव तक

मुगल साम्राज्य का ढांचा पिरामिड की तरह था:

  1. केन्द्र – बादशाह (सर्वोच्च सेनापति और न्यायाधीश)

  2. सूबा (राज्य) – सूबेदार / नाजिम

  3. सरकार (जिला) – फौजदार

  4. परगना (तहसील) – शिकदार

  5. मौजा (गाँव) – मुकद्दम / चौधरी (सबसे छोटी इकाई)


प्रमुख केन्द्रीय अधिकारी और उनके कार्य

बादशाह की सहायता के लिए एक मंत्रिपरिषद होती थी जिसे विजारत कहा जाता था।

  • वकील-ए-मुतलक (वजीर): बादशाह के बाद सबसे शक्तिशाली पद। माहम अनगा मुगल काल की प्रथम एवं अंतिम महिला वजीर थीं।

  • दीवान-ए-कुल: वित्त विभाग और राजस्व नीति का प्रमुख।

  • मीर बख्शी: सैन्य विभाग का प्रमुख। 'सरखत' पर हस्ताक्षर के बाद ही सैनिकों को वेतन मिलता था।

  • सद्र-उस-सुदूर: धार्मिक मामलों और दान का प्रमुख।

  • मुहतसिब: औरंगजेब द्वारा नियुक्त, जो जनता के नैतिक आचरण की निगरानी करता था।

  • मीर-ए-आतिश: शाही तोपखाना विभाग।


प्रान्तीय और जिला प्रशासन

अकबर ने 1580 ई. में साम्राज्य को सूबों में विभाजित किया।

  • सूबेदार: प्रान्त का सर्वोच्च सैनिक व असैनिक अधिकारी।

  • अमलगुजार: जिले (सरकार) में राजस्व वसूली का मुख्य अधिकारी।

  • बितक्ची: भूमि अभिलेख तैयार करने वाला।


परगना प्रशासन व्यवस्था (विस्तृत विवरण)

परगना स्तर पर शासन चलाने के लिए निम्नलिखित पदों की व्यवस्था थी:

पदमुख्य कार्य
शिकदारपरगना का सर्वोच्च प्रशासक (शांति एवं कानून-व्यवस्था)।
आमिल (करोड़ी)राजस्व वसूली। अकबर ने 1574 में 1 करोड़ दाम आय वाले क्षेत्रों में इन्हें नियुक्त किया।
अमीनशाहजहाँ द्वारा नियुक्त; मालगुजारी (कर) का निर्धारण करना।
फौजदारमुख्य खजांची और राजस्व की सुरक्षा।
कारकूनपरगने का लिपिक (Clerk); लिखित रिकॉर्ड तैयार करना।

विशेष तथ्य: परगने का समस्त लेखा-जोखा फारसी भाषा में रखा जाता था।


मनसबदारी प्रथा और सूबों की संख्या

अकबर ने 1575 ई. में मनसबदारी प्रथा शुरू की, जो योग्यता के आधार पर पद (ओहदा) तय करती थी।

शासक के अनुसार सूबों की संख्या:

  • अकबर: 12 (अंत में 15)

  • जहाँगीर: 15

  • शाहजहाँ: 18

  • औरंगजेब: 20 / 21 (सर्वाधिक सूबे)


मुगल सैन्य व्यवस्था: मनसबदारी और तोपखाना

मुगल सेना की शक्ति का मुख्य आधार उसकी संगठित मनसबदारी व्यवस्था और आधुनिक तोपखाना था।

1. मनसबदारी प्रथा (The Mansabdari System)

  • आरंभ: अकबर द्वारा 1575 ई. में।

  • अर्थ: 'मनसब' एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है पद या श्रेणी

  • जात और सवार: मनसब दो भागों में विभाजित था:

    • जात: इससे व्यक्ति के व्यक्तिगत पद और वेतन का पता चलता था।

    • सवार: इससे यह निर्धारित होता था कि उस मनसबदार को कितने घुड़सवार रखने हैं।

  • श्रेणियाँ: सबसे छोटा मनसब 10 का और सबसे बड़ा 10,000 का होता था (राजकुमारों के लिए यह और भी अधिक था)।

2. शाही तोपखाना (Mir-e-Atish)

मुगलों ने भारत में युद्ध कौशल को पूरी तरह बदल दिया।

  • प्रमुख: तोपखाने के प्रमुख को मीर-ए-आतिश कहा जाता था।

  • प्रकार: * भारी तोपखाना: किलों को तोड़ने के लिए।

    • हल्का तोपखाना: जिसे 'जिनजाल' या 'शतुर्नाल' (ऊँटों पर रखी तोपें) कहा जाता था, जो युद्ध के मैदान में गतिशीलता प्रदान करती थीं।


मुगल भू-राजस्व: दहसाला प्रणाली (Zabti/Dahsala System)

राजस्व प्रशासन मुगल साम्राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ थी। अकबर के समय वित्त मंत्री राजा टोडरमल ने इसमें क्रांतिकारी बदलाव किए।

दहसाला प्रणाली की मुख्य बातें (1580 ई.)

  • प्रवर्तक: राजा टोडरमल (इसीलिए इसे टोडरमल बंदोबस्त भी कहते हैं)।

  • प्रक्रिया: पिछले 10 वर्षों की फसलों की पैदावार और उनके मूल्यों का औसत निकालकर कर (Tax) निर्धारित किया जाता था।

  • भूमि का वर्गीकरण: पैदावार की निरंतरता के आधार पर भूमि को चार भागों में बाँटा गया था:

    1. पोलज: जिस पर हर साल खेती होती थी (सबसे उपजाऊ)।

    2. परती: जिस पर एक या दो साल छोड़कर खेती होती थी।

    3. चाचर: जिस पर 3-4 साल बाद खेती होती थी।

    4. बंजर: जो 5 साल या उससे अधिक समय से खाली पड़ी हो।


मुगलकालीन कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक शब्दावली

शब्दअर्थ / विवरण
खालसा भूमिवह भूमि जिसका राजस्व सीधे शाही खजाने में जाता था।
जागीर भूमिजो अधिकारियों को उनके वेतन के बदले में दी जाती थी।
मदद-ए-माशविद्वानों और धार्मिक व्यक्तियों को दी जाने वाली कर-मुक्त भूमि।
नस्क / कनकूतफसल के अनुमान के आधार पर लगान का निर्धारण।

मुगल प्रशासन: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. मुगल प्रशासनिक मॉडल का जनक किसे माना जाता है?

अकबर

2. मुगल प्रशासन को "पेपर स्टेट" (Paper State) क्यों कहा जाता है?

"पेपर स्टेट"

3. 'मज़हर' (Mazhar) क्या था और इसे किसने लागू किया?

1579 ई.

4. मनसबदारी प्रथा में 'जात' और 'सवार' का क्या अर्थ है?

'जात'

5. मुगल काल में 'करोड़ी' कौन होता था?

1 करोड़ दाम

6. मुगल प्रशासन में सबसे छोटी इकाई कौन सी थी?

गाँव (मौजा)

7. मुगल काल की राजकीय भाषा क्या थी?

फारसी

8. 'दहसाला प्रणाली' का मुख्य उद्देश्य क्या था?

दहसाला प्रणाली (टोडरमल बंदोबस्त) का मुख्य उद्देश्य राजस्व निर्धारण को वैज्ञानिक बनाना था। इसमें पिछले 10 वर्षों की पैदावार और कीमतों के औसत के आधार पर कर तय किया जाता था, जिससे किसानों और राज्य दोनों को अनिश्चितता से राहत मिली।



निष्कर्ष:

मुगल प्रशासन अपनी जटिल नियंत्रण प्रणाली और स्पष्ट कार्य-विभाजन के कारण सफल रहा। इसने न केवल साम्राज्य को स्थिरता दी, बल्कि बाद में ब्रिटिश प्रशासनिक ढांचे को भी प्रभावित किया।

Bhakti and Sufi Movements in India: चिश्ती सिलसिला (ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती से अमीर खुसरो तक)

 Bhakti and Sufi Movements in India: चिश्ती सिलसिला (ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती से अमीर खुसरो तक)

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Sufi Movement in Hindi: भारत में सूफी आंदोलन मध्यकालीन इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस ब्लॉग में हम चिश्ती सिलसिला (Chishti Silsila), उसके संस्थापक ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, और अन्य महान सूफी संतों के बारे में विस्तार से जानेंगे। यदि आप UPSC, SSC या PSC की तैयारी कर रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


Bhakti & Sufi Movement in India :- Part 1 मध्यकालीन भारत का इतिहास , भक्ति आंदोलन : वैष्णव संप्रदाय, शंकराचार्य का जीवन, दर्शन, मठ व ग्रंथ

मध्यकालीन भारत का इतिहास - भक्ति एवं सूफी आंदोलन Part -2( रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य एवं निम्बार्काचार्य ,रामानंद, कबीरदास एवं रैदास / रविदास )


​चिश्ती सिलसिला (Chishti Silsila) का इतिहास

​भारत में चिश्ती सिलसिले की जड़ें बहुत गहरी हैं। इस सिलसिले के संत अपनी सादगी और वैरागी जीवन के लिए जाने जाते थे।

  • भारत में संस्थापक: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती।
  • मूल संस्थापक (विदेश में): अबु अब्दाल चिश्ती (खुरासान/हैरात)।
  • तर्क-ए-दुनिया: चिश्ती संत सांसारिक सुखों का त्याग करते थे, जिसे सूफी शब्दावली में 'तर्क-ए-दुनिया' कहा जाता है।

​प्रमुख चिश्ती संत और उनकी दरगाह (Quick Table)

सूफी संत

मृत्यु वर्ष

दरगाह का स्थान

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती

1235 ई.

अजमेर (राजस्थान)

कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी

1235 ई.

दिल्ली

बाबा फरीद (गंज-ए-शक्कर)

1265 ई.

अजोधन (पाकिस्तान)

निजामुद्दीन औलिया

1325 ई.

दिल्ली

नासिरुद्दीन चिराग-ए-देहली

1356 ई.

दिल्ली



1. ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (गरीब नवाज)

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती 1192 ई. में मोहम्मद गौरी के साथ भारत आए थे। उस समय दिल्ली पर पृथ्वीराज चौहान तृतीय का शासन था।

  • जन्म: 1141 ई., सिस्तान (ईरान)।
  • उपाधियाँ: मोहम्मद गौरी ने उन्हें 'सुल्तान-उल-हिंद' (हिंद का आध्यात्मिक राजा) कहा, जबकि भक्त उन्हें 'गरीब नवाज' कहते हैं।
  • दरगाह: इनकी मजार का निर्माण इल्तुतमिश ने शुरू करवाया और पक्की मजार मालवा के सुल्तान मोहम्मद खिलजी ने बनवाई।
  • विशेष तथ्य: अजमेर शरीफ में रज्जब माह की 1 से 6 तारीख तक 'उर्स' का मेला लगता है, जो सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है।

​2. हजरत निजामुद्दीन औलिया और अमीर खुसरो

​निजामुद्दीन औलिया चिश्ती सिलसिले के सबसे लोकप्रिय संत माने जाते हैं। उन्होंने 7 सुल्तानों का शासन देखा लेकिन कभी किसी के दरबार में नहीं गए।

  • योग और प्राणायाम: वे योग में इतने निपुण थे कि उन्हें 'योगी सिद्ध' भी कहा जाता था। उनकी योग विधि को 'हब्स-ए-दम' कहते हैं।
  • प्रसिद्ध संवाद: जब गयासुद्दीन तुगलक ने उन्हें दिल्ली छोड़ने का आदेश दिया, तो औलिया ने कहा था— "हनुज दिल्ली दूर अस्त" (दिल्ली अभी दूर है)।
  • अमीर खुसरो: औलिया के सबसे प्रिय शिष्य। उन्हें 'तोता-ए-हिंद' कहा जाता है। उन्होंने सितार और तबले का आविष्कार किया और वे उर्दू के पहले शायर माने जाते हैं।

​3. अन्य महत्वपूर्ण सूफी सिलसिले (Sufi Silsila)

​सुहरावर्दी संप्रदाय (Suhrawardi)

​इसकी स्थापना बहाउद्दीन जकारिया ने भारत में की थी। चिश्ती संतों के विपरीत, ये संत राजकीय संरक्षण स्वीकार करते थे और ऐश्वर्यपूर्ण जीवन जीते थे।

​कादिरी संप्रदाय (Qadri)

​यह इस्लाम का पहला रहस्यवादी पंथ था। मुगल शहजादा दारा शिकोह इसी सिलसिले का अनुयायी था। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की नींव कादिरी संत मियाँ मीर ने ही रखी थी।

​नक्शबंदी संप्रदाय (Naqshbandi)

​यह सबसे कट्टर सिलसिला था। शेख अहमद सरहिन्दी इसके प्रमुख संत थे जिन्होंने अकबर की उदार नीतियों का विरोध किया था। औरंगजेब इसी विचारधारा से प्रभावित था।

​अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्र.1 भारत में चिश्ती सिलसिले की शुरुआत किसने की?

उत्तर: भारत में चिश्ती सिलसिले की शुरुआत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने 12वीं शताब्दी के अंत में की थी।

प्र.2 'तोता-ए-हिंद' किसे कहा जाता है?

उत्तर: प्रसिद्ध कवि और सूफी शिष्य अमीर खुसरो को 'तोता-ए-हिंद' कहा जाता है।

प्र.3 कुतुबमीनार का नाम किस सूफी संत के नाम पर रखा गया है?

उत्तर: कुतुबमीनार का नाम ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी के नाम पर रखा गया है।


मध्यकालीन भारत का इतिहास - भक्ति एवं सूफी आंदोलन Part -4 महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन(ज्ञानेश्वर, नामदेव, तुकाराम, एकनाथ, समर्थ गुरु रामदास, चोखामेला,सूफी आंदोलन : प्रारम्भ, शब्दावली, दर्शन,)

मध्यकालीन भारत का इतिहास - भक्ति एवं सूफी आंदोलन Part -4 महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन(ज्ञानेश्वर, नामदेव, तुकाराम, एकनाथ, समर्थ गुरु रामदास, चोखामेला,सूफी आंदोलन : प्रारम्भ, शब्दावली, दर्शन,)

मध्यकालीन भारत का इतिहास - भक्ति एवं सूफी आंदोलन Part -4 महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन(ज्ञानेश्वर, नामदेव, तुकाराम, एकनाथ, समर्थ गुरु रामदास, चोखामेला,सूफी आंदोलन  प्रारम्भ, शब्दावली, दर्शन,)





महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन(ज्ञानेश्वर, नामदेव, तुकाराम, एकनाथ, समर्थ गुरु रामदास, चोखामेला)

महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन

  1. प्रेरक देवताविठोबा / विट्ठल (पंढरपुर का देवता, विष्णु का अवतार)
  2. महाराष्ट्र में धर्म दो भागों में विभाजित था –

1. वारकरी / वरकरी संप्रदाय

  • वरकरी – परिक्रमा करने वाले लोग
  • सौम्य स्वभाव, भावुक जनता का धर्म
  • कृष्ण (विठोबा) की पूजा
  • प्रमुख संत – ज्ञानदेव, नामदेव, तुकाराम

2. धरकरी / धरना संप्रदाय

  • एक ही स्थान पर रहने वाले
  • राम की पूजा
  • सैद्धान्तिक प्रवृत्ति
  • संस्थापक – समर्थ गुरु रामदास


महाराष्ट्र के प्रमुख भक्ति संत


🕉️ संत ज्ञानेश्वर

  • (1285–1353 ई.)
  • जन्म – 1285 ई., औरंगाबाद (महाराष्ट्र)
  • गुरु – निवृत्तिनाथ
  • पिता – विट्ठापंत
  • माता – रुक्मणी बाई

प्रमुख ग्रंथ

  1. ज्ञानेश्वरी / भावार्थ दीपिका
  2. मराठी भाषा में श्रीमद्भगवद्गीता की टीका
  3. अमृतानुभव
  4. चंगदेवप्रशस्ति


🕉️ संत नामदेव

  • (1270–1350 ई.)
  • जन्म – 26 अक्टूबर 1270
  • जन्म स्थान – पंढरपुर, बामणी गाँव (कृष्णा नदी तट)
  • पिता – दामासेठ
  • माता – गौणदेवी
  • पत्नी – राजाबाई
  • गुरु – विसोबा खेचर (विठोबा)

अन्य तथ्य

  • जाति – छीपा
  • बचपन में डाकू, हृदय परिवर्तन के बाद संत
  • 61 पद्य आदिग्रंथ में शामिल
  • दिल्ली में सूफी संतों से वाद-विवाद
  • ज्ञानेश्वर के साथ भ्रमण
  • बाद में महाराष्ट्र छोड़कर धोमन गाँव (गुरदासपुर, पंजाब) में निवास
  • हिन्दू एवं सिख – दोनों में समान रूप से पूज्य


🕉️ संत तुकाराम

  • (1520–1598 ई.)
  • जन्म – पुणे (महाराष्ट्र)
  • पिता – बोल्होबा / बहेला
  • माता – कनकाई
  • पत्नी – जीजाबाई
  • जाति – शूद्र

भक्ति

  1. स्वयं विठोबा की पूजा
  2. ग्रंथ – तुकाराम री वाणी


🕉️ एकनाथ

  • (1533–1599 ई.)
  • जन्म – पैठन, औरंगाबाद (महाराष्ट्र)
  • गुरु – जनार्दनस्वामी
  • संत ज्ञानेश्वर से प्रभावित

कार्य

  • ज्ञानेश्वरी का प्रामाणिक संस्करण प्रकाशित

ग्रंथ

  1. चतुश्लोकी भागवत
  2. भावार्थ रामायण
  3. रुक्मणी स्वयंवर
  4. भगवद्गीता के चार श्लोकों पर टीका


🕉️ समर्थ गुरु रामदास

  • (1608–1681 ई.)
  • मूल नाम – नारायण सूर्यजी पन्त
  • प्रसिद्धि – समर्थ गुरु
  • धरकरी संप्रदाय के संस्थापक

जीवन

  • 12 वर्ष तक सम्पूर्ण भारत भ्रमण
  • कृष्णा नदी तट पर चफाल में राम मंदिर
  • वहीं निवास

संप्रदाय

  • रामदासी संप्रदाय / परमार्थ संप्रदाय
  • मुख्य आश्रम – सज्जनगढ़ (सतारा)

विशेषताएँ

  • ‘राम-राम’ अभिवादन की शुरुआत
  • पंथ का स्वरूप – गैर-राजनीतिक
  • पूर्णतः ब्राह्मणों का पंथ
  • शिवाजी के आध्यात्मिक गुरु

प्रमुख ग्रंथ

  • दासबोध (दशबोध)
  • आनन्दवन भुवन


🕉️ चोखामेला

  • जन्म – महार जाति, सोलापुर जिला, मंगलवेढ़ा
  • गुरु – नामदेव
  • उपाधि – महाराष्ट्र का पहला दलित कवि

अभंग परंपरा

  • 13वीं सदी में वारकरी संतों द्वारा
  • विठोबा की स्तुति में रचित छंद
  • शूद्रों व अस्पृश्यों के लिए भी वारकरी पंथ खुला

परिवार

  • माता-पिता, पत्नी सोयराबाई, बहन निर्मला, पुत्र कर्ममेला,
  • सोयराबाई का भाई बंका महार – सभी विठ्ठल भक्त
  • सभी ने अभंग रचना की

कृति

  • विवेकदीप


सूफी आंदोलन : प्रारम्भ, शब्दावली, दर्शन

☪️ सूफी आंदोलन

  • भारत में सूफी आंदोलन का प्रारम्भ
  • भारत में सूफी आंदोलन का प्रारम्भ तुर्क आक्रांताओं के साथ माना जाता है।
  • प्रथम तुर्क आक्रांता महमूद गजनवी के समय पहली बार सूफी संत भारत आए।

प्रारम्भिक सूफी संत

  1. 1005 ई. – महमूद गजनवी की पंजाब विजय के समय
  2. शेख इस्माइल भारत आने वाले प्रथम सूफी संत थे।
  3. भारत आने वाले दूसरे सूफी संत

  4. अली बिन उस्मान अल हुजवेरी
  5. 12वीं शताब्दी में –

  • सैय्यद अहमद सखी सखर भारत आए
  • लखदाता’ के नाम से प्रसिद्ध

  1. 1192 ई. – तराइन के द्वितीय युद्ध के समय

  • ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भारत आए
  • मोहम्मद गौरी के साथ


सूफी शब्दावली (Sufi Terminology)

  • पीर – गुरु
  • मुरीद – शिष्य
  • वली – गुरु का उत्तराधिकारी
  • खानकाह – सूफियों का निवास स्थान (मठ)
  • मजार – समाधि स्थल

फना / समा

  1. सूफी ईश्वर को महबूब और स्वयं को महबूबा मानते हैं।
  2. ईश्वर को रिझाने हेतु संगीत (कव्वाली) गाई जाती है जिसे समा कहते हैं।
  3. समा के माध्यम से ईश्वर में विलीन हो जाना ही फना कहलाता है।
  4. तसव्वुफ – रहस्यात्मक प्रवृत्तियाँ / आंदोलन
  5. मलफूजात – सूफी संतों के उपदेशों का संकलन
  6. मकतूबात – सूफी संतों के पत्रों का संकलन
  7. विलायत – राज्य नियंत्रण से मुक्त क्षेत्र
  8. खलीफा – इस्लाम का सर्वोच्च धार्मिक गुरु
  9. उलेमा – धार्मिक विद्वान
  10. काजी – धार्मिक न्यायाधीश


सूफी साहित्य

  • भारत में इस्लामी रहस्यवाद पर लिखी गई प्रथम पुस्तक
  • “कश्फ-उल-महजूब”
  • लेखक – अली बिन उस्मान अल हुजवेरी

प्रारम्भिक रहस्यवादी संत (विश्व संदर्भ)

  1. राबिया (8वीं शताब्दी)

  • महान महिला सूफी संत
  • तुलना – मीरा बाई से की जाती है

  1. मंसूर बिन अल-हल्लाज (10वीं शताब्दी)

  • स्वयं को “अनल-हक” (मैं ही ईश्वर हूँ) कहा
  • परिणामस्वरूप फाँसी दी गई


सूफी दर्शन की दो प्रमुख विचारधाराएँ

1. वहदत-उल-वुजूद

  • एक ही ईश्वर में विश्वास
  • एकेश्वरवाद
  • प्रवर्तक – इब्न-उल-अरबी

2. वहदत-उल-शुहूद

  • आत्मा व परमात्मा में दास-मालिक संबंध
  • प्रवर्तक – शेख अहमद सरहिन्दी
  • नोट – दोनों विचारधाराओं का अंतिम लक्ष्य
  • 👉 ईश्वर की प्राप्ति है।


सूफी आंदोलन की दो प्रवृत्तियाँ

1. बा-शरा

  • शरीयत (इस्लामी कानून) में विश्वास
  • आगे चलकर अनेक सिलसिलों में विभाजित –

    1. चिश्ती
    2. सुहरावर्दी
    3. कादिरी
    4. नक्शबंदी
    5. फिरदौसी
    6. सत्तारी

2. बे-शरा

  • शरीयत में विश्वास नहीं
  • भ्रमणशील जीवन
  • आगे चलकर पतन / समाप्त


प्रमुख सूफी सिलसिले एवं भारत में उनके संस्थापक

  • सिलसिला
  • संस्थापक
  • स्थान
  • चिश्ती
  • ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती
  • अजमेर
  • सुहरावर्दी
  • शिहाबुद्दीन सुहरावर्दी
  • मुल्तान
  • फिरदौसी
  • बदरुद्दीन समरकंदी
  • बिहार
  • सत्तारी
  • शाह अब्दुल्ला सत्तारी
  • जौनपुर
  • कादिरी
  • नासिरुद्दीन जिलानी
  • उच्छ
  • नक्शबंदी
  • ख्वाजा बाकी बिल्लाह
  • उच्छ

भारत में आगमन का क्रम

  • चिश्ती → सुहरावर्दी → फिरदौसी → सत्तारी → कादिरी → नक्शबंदी


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