Rj News

Welcome to Rj News , your go-to resource for acing government exams! Our blog is dedicated to providing comprehensive study notes, tips, and strategies tailored specifically for aspiring candidates.

Rajasthan police si

History of rajasthan

Rj Exam

राजस्थानी साहित्य: सम्पूर्ण इतिहास, कालक्रम और प्रमुख रचनाएँ

राजस्थानी साहित्य: सम्पूर्ण इतिहास, कालक्रम और प्रमुख रचनाएँ

 

यह ब्लॉग राजस्थानी साहित्य का सम्पूर्ण इतिहास, कालक्रम, प्रमुख कवि-लेखक और प्रत्येक कालखंड की शीर्ष रचनाएँ (सारांश सहित) हिन्दी में प्रस्तुत करता है।


परिचय

राजस्थानी साहित्य राजस्थान की संस्कृति, लोकजीवन, वीरता और भक्ति की परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। इसकी जड़ें प्राचीन अपभ्रंश और लोककथाओं में मिलती हैं।


कालक्रम (Timeline)

  • प्राचीन और वीरगाथा काल (1050–1450)
  • भक्तिकाल (1450–1650)
  • रीतिकाल और दरबारी काल (1650–1850)
  • आधुनिक पूर्वार्त (1850–1947)
  • स्वतंत्रता-पश्चात और समकालीन काल (1947–वर्तमान)


प्रमुख कवि व लेखक (सारांश)

  • मीरा बाई – भक्तिकाव्य की प्रतीक कवयित्री।
  • सूर्यमल्ल मिश्रण – “वंश भास्कर”, “वीर सतसई” के रचयिता।
  • कन्हैयालाल सेठिया – आधुनिक कविता के शिल्पी।
  • विजयदान देथा – लोककथा और आधुनिक गद्य के जनक।


प्रत्येक कालखंड की शीर्ष 10 प्रमुख रचनाएँ और उनका सारांश

🕉️ 1. प्राचीन और वीरगाथा काल (1050–1450)

क्रम रचना का नाम रचनाकार सारांश
1 पृथ्वीराज रासो (अंश) चंदबरदाई/चारण परंपरा वीरता और शौर्य की महाकाव्य गाथा।
2 राणां रास जागदेव चारण मेवाड़ के शूरवीरों के पराक्रम की कथा।
3 वीर सागर अज्ञात चारण कवि युद्ध, सम्मान और धर्म के आदर्श।
4 पाबूजी रा पठ लोक परंपरा लोकनायक पाबूजी की वीरगाथा।
5 देव नारायण महागाथा लोक कवि देव नारायण के चमत्कारी जीवन का वर्णन।
6 गोगाजी रा चौपड़ लोककवि लोकदेवता गोगाजी के पराक्रम की कथा।
7 हमीर रासो चारण कवि राणा हम्मीर के शौर्य का बखान।
8 जालौर रा दुर्ग कथा स्थानीय कवि जालौर की वीरता और बलिदान की अमर कहानी।
9 धोलामारू री बात लोक कथा प्रेम और त्याग का प्रतीक कथा-गीत।
10 ढोला मारू रा दोहा लोक कवि राजस्थानी प्रेमकाव्य की प्रारम्भिक मिसाल।

🕉️ 2. भक्तिकाल (1450–1650)

क्रम रचना का नाम रचनाकार सारांश
1 मीरा के पद मीरा बाई कृष्ण भक्ति और आत्मसमर्पण का प्रतीक।
2 नारायणी रास नारायणीदास भक्ति और नीति का संगम।
3 ईसरदास जी के पद ईसरदास सगुण भक्ति पर आधारित कविताएँ।
4 दूदा रास दूदा जी चारण शौर्य और भक्ति का मिश्रण।
5 रामदेवरा री बात लोककवि लोकदेवता बाबा रामदेव की महिमा।
6 पाबूजी री फुलवारी चारण कवि लोकदेवता पाबूजी के जीवन प्रसंग।
7 भक्त प्रहलाद कथा अज्ञात कवि भक्त और ईश्वर के बीच आस्था की कथा।
8 भक्तमाल (राजस्थानी अंश) नाभादास प्रेरित संत चरित्रों का वर्णन।
9 हरिदासी पदावली हरिदास जी भक्ति गीतों का संकलन।
10 गोविंद भक्त रास स्थानीय कवि कृष्ण प्रेम और नारी संवेदना का चित्रण।

🕉️ 3. रीतिकाल और दरबारी काल (1650–1850)

क्रम रचना का नाम रचनाकार सारांश
1 डिंगल सतसई किसनलाल आसिया वीरता, श्रृंगार और नीति पर आधारित श्लोक।
2 पिंगल गीतावली जालधर श्रृंगारिक काव्य का श्रेष्ठ उदाहरण।
3 राजरूपकाव्य चिंतामण कवि दरबारी जीवन और आदर्शों का चित्रण।
4 रणझंकार कृष्णदास युद्ध और वीरता का वर्णन।
5 कुमार विनोद नाथ कवि प्रेम और सौंदर्य की व्याख्या।
6 राजकवि रास अज्ञात राजदरबार की नीति और मर्यादा पर आधारित।
7 महाराणा रास चारण कवि मेवाड़ के राजाओं की प्रशंसा।
8 राणी रूप कथा कवि हरीदास नारी सौंदर्य और मर्यादा पर आधारित कथा।
9 चिंतामण नीतिशतक चिंतामण नीति, धर्म और आचार का काव्य रूप।
10 प्रेमप्रकाश पिंगल कवि प्रेमभाव और आदर्श नारी का चित्रण।

🕉️ 4. आधुनिक पूर्वार्त (1850–1947)

क्रम रचना का नाम रचनाकार सारांश
1 वंश भास्कर सूर्यमल्ल मिश्रण राजस्थानी इतिहास और संस्कृति का दस्तावेज़।
2 वीर सतसई सूर्यमल्ल मिश्रण वीरता और नैतिकता के दोहों का संग्रह।
3 देश प्रेम कथा नाथूराम ढाणी स्वतंत्रता और सामाजिक चेतना का चित्रण।
4 राजस्थान चरित्र कवि जगदीशदान रतनू ऐतिहासिक गाथाओं का पुनर्लेखन।
5 लोकरी बात कवि गोपालदान लोकजीवन और सामाजिक सुधार पर केंद्रित।
6 आदर्श राजपूत कवि कंवरदान शौर्य और मर्यादा की नीति रचना।
7 राणा प्रताप चरित कवि रतनू वीरता और बलिदान का महाकाव्य।
8 स्वदेश रागिनी कवि लालचंद स्वदेश प्रेम और स्वतंत्रता का गीत।
9 लोकनायक कथा कवि हरीश लोकनेताओं और सामाजिक सुधारकों पर।
10 प्रेमगीतांजलि कवि नारायणदास प्रेम और मानवता का मिश्रण।

🕉️ 5. स्वतंत्रता-पश्चात और समकालीन काल (1947–वर्तमान)

क्रम रचना का नाम रचनाकार सारांश
1 धरती धोरा री कन्हैयालाल सेठिया राजस्थान की माटी और लोकजीवन की गाथा।
2 आग और आहट कन्हैयालाल सेठिया समकालीन संघर्ष और सामाजिक परिवर्तन।
3 बातां री फुलवारी विजयदान देथा लोककथाओं का आधुनिक रूपांतरण।
4 उज्जल बातां विजयदान देथा मानवता, नैतिकता और लोकआस्था का चित्रण।
5 रंग रेती दलचंद भाटी ग्रामीण जीवन की संवेदनशील कहानियाँ।
6 माटी री गंध केशरदेव शर्मा राजस्थान की मिट्टी से जुड़ी स्मृतियाँ।
7 थार री धूप भंवरलाल सेठिया मरुभूमि के जीवन की कठिनाइयाँ और सौंदर्य।
8 मरुधर री माटी रामनिवास शर्मा राजस्थानी जीवन दर्शन।
9 जीवन रा रंग मंजर भाटी सामाजिक विडंबनाओं पर नाटकीय व्यंग्य।
10 लोकरी लहर आधुनिक लेखक समूह लोकसंस्कृति और परंपरा पर नई दृष्टि।

राजस्थानी साहित्य न केवल वीरता और भक्ति की परंपरा का वाहक है, बल्कि यह आधुनिक युग में भी अपनी पहचान बनाए हुए है। इसकी रचनाएँ राजस्थान की आत्मा, लोकसंस्कृति और जीवन की जड़ों से जुड़ी हैं।



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कृपया सम्बन्धित पोस्ट को लेकर अपने सुझाव दें।

Bottom Ad [Post Page]