CET Graduation Level 2026 Biology Notes: ऊतक (Tissue) सम्पूर्ण अध्याय, प्रकार, कार्य एवं महत्वपूर्ण तथ्य
CET Graduation 2026 Biology Notes in Hindi: ऊतक (Tissue) की सम्पूर्ण जानकारी, पादप ऊतक, जन्तु ऊतक, जाइलम, फ्लोएम, उपकला, पेशी, संयोजी एवं तंत्रिका ऊतक के महत्वपूर्ण तथ्य और परीक्षा उपयोगी नोट्स।
जीव विज्ञान (Biology) में ऊतक (Tissue) एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। राजस्थान CET Graduation Level 2026, RPSC, REET, Patwar, LDC, वनपाल, कृषि पर्यवेक्षक एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में ऊतक से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इस अध्याय में पादप एवं जन्तु ऊतकों की संरचना, प्रकार, कार्य एवं विशेषताएँ शामिल हैं।
ऊतक (Tissue) क्या है?
एक समान संरचना तथा समान कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक (Tissue) कहते हैं।
कोशिकाओं के मध्य उपस्थित तरल पदार्थ को ऊतक द्रव्य (Tissue Fluid) कहा जाता है। यह कोशिकाओं को पोषण प्रदान करता है तथा उत्सर्जी पदार्थों को बाहर निकालने में सहायता करता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- ऊतकों के अध्ययन को औतिकी (Histology) कहते हैं।
- औतिकी को सूक्ष्म शरीर रचना विज्ञान (Microscopic Anatomy) भी कहा जाता है।
- "ऊतक" शब्द का प्रयोग बिशैट (Bichat) ने किया।
- "हिस्टोलॉजी" शब्द मेयर (Meyer) ने दिया।
- हिस्टोलॉजी के जनक मार्सेलो मैल्पीघी (Marcello Malpighi) हैं।
ऊतकों का वर्गीकरण
ऊतक मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—
- पादप ऊतक (Plant Tissue)
- जन्तु ऊतक (Animal Tissue)
A. पादप ऊतक (Plant Tissue)
पौधों में कोशिकाओं के समूह को पादप ऊतक कहा जाता है।
पादप ऊतक दो प्रकार के होते हैं—
1. विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue)
2. स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)
1. विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue)
ऐसा ऊतक जिसकी कोशिकाएँ निरंतर विभाजन करती रहती हैं, विभज्योतक ऊतक कहलाता है।
प्रमुख विशेषताएँ
- सक्रिय कोशिका विभाजन
- पौधों की वृद्धि के लिए उत्तरदायी
- विषाणु मुक्त पौधों के उत्पादन में उपयोगी
विभज्योतक ऊतक के प्रकार
(i) शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem)
स्थान:
- जड़ एवं तने के शीर्ष भाग में
कार्य:
- पौधे की लंबाई बढ़ाना
(ii) अंतर्वेशी विभज्योतक (Intercalary Meristem)
स्थान:
- स्थायी ऊतकों के बीच
उदाहरण:
- घास (Poaceae)
कार्य:
- घास को काटने के बाद पुनः बढ़ाना
परीक्षा तथ्य
शीर्षस्थ एवं अंतर्वेशी मेरिस्टेम को प्राथमिक मेरिस्टेम कहा जाता है।
(iii) पार्श्वीय विभज्योतक (Lateral Meristem)
उदाहरण:
- पूलीय कैंबियम
- अंतरापूलीय कैंबियम
- कॉर्क कैंबियम
कार्य:
- तने एवं जड़ की मोटाई बढ़ाना
- द्वितीयक वृद्धि करना
2. स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)
जब विभज्योतक ऊतक विभाजन की क्षमता खो देता है तो वह स्थायी ऊतक कहलाता है।
स्थायी ऊतक के प्रकार
(i) सरल स्थायी ऊतक
(ii) जटिल स्थायी ऊतक
(i) सरल स्थायी ऊतक
एक ही प्रकार की कोशिकाओं से निर्मित ऊतक।
प्रकार:
- पैरेनकाइमा
- कोलेनकाइमा
- स्क्लेरेनकाइमा
(a) पैरेनकाइमा (Parenchyma)
विशेषताएँ
- कोशिकाओं के बीच अंतराकोशिकीय स्थान
- कोशिका भित्ति सेलुलोज की
- कोशिकाएँ जीवित
कार्य
- प्रकाश संश्लेषण
- भोजन संग्रहण
- स्रवण
(b) कोलेनकाइमा (Collenchyma)
विशेषताएँ
- द्विबीजपत्री पौधों की बाह्य त्वचा के नीचे
- कोनों पर सेलुलोज, पेक्टीन और हेमीसेलुलोज का जमाव
कार्य
- यांत्रिक मजबूती
- लचीलापन प्रदान करना
(c) स्क्लेरेनकाइमा (Sclerenchyma)
विशेषताएँ
- मृत कोशिकाएँ
- लिग्निन युक्त मोटी भित्ति
- अत्यधिक कठोर
उदाहरण
- अमरूद
- नाशपाती
- चीकू
- चाय की पत्तियाँ
- दलहनी बीजों का आवरण
कार्य
- पौधे को मजबूती प्रदान करना
(ii) जटिल स्थायी ऊतक
एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से निर्मित ऊतक।
प्रकार:
- जाइलम
- फ्लोएम
जाइलम (Xylem)
कार्य
जल एवं खनिज लवणों का परिवहन
घटक
- ट्रैकीड
- वाहिका
- जाइलम तंतु
- जाइलम पैरेनकाइमा
परीक्षा तथ्य
- प्रोटोजाइलम सबसे पहले बनता है।
- उसके बाद बनने वाला जाइलम मेटाजाइलम कहलाता है।
फ्लोएम (Phloem)
कार्य
भोजन का परिवहन
घटक
- सहचर कोशिका
- चालनी नलिका
- फ्लोएम तंतु
- फ्लोएम पैरेनकाइमा
महत्वपूर्ण तथ्य
चालनी नलिका (Sieve Tube) में केन्द्रक नहीं पाया जाता।
B. जन्तु ऊतक (Animal Tissue)
जन्तु औतिकी (Animal Histology) के जनक बिशैट हैं।
जन्तुओं में ऊतक चार प्रकार के होते हैं—
- उपकला ऊतक
- पेशी ऊतक
- संयोजी ऊतक
- तंत्रिका ऊतक
1. उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)
कार्य
- सुरक्षा
- अवशोषण
- स्रवण
- उत्सर्जन
- पुनरुद्भवन
प्रकार
सरल उपकला
शल्की उपकला (Squamous)
स्थान:
- रक्त वाहिकाएँ
- फेफड़ों के वायुकोष
कार्य:
- विसरण
घनाकार उपकला (Cuboidal)
स्थान:
- वृक्क नलिकाएँ
- ग्रंथियाँ
कार्य:
- अवशोषण एवं स्रवण
स्तंभाकार उपकला (Columnar)
स्थान:
- आमाशय
- आंत
कार्य:
- अवशोषण एवं स्रवण
संयुक्त उपकला
कार्य:
- यांत्रिक एवं रासायनिक सुरक्षा
स्थान:
- त्वचा
- मुखगुहा
- ग्रसनी
2. पेशी ऊतक (Muscular Tissue)
प्रकार
(i) कंकाल पेशी
- ऐच्छिक
- रेखित
- अस्थियों से जुड़ी
(ii) चिकनी पेशी
- अरेखित
- अनैच्छिक
स्थान:
- रक्त वाहिकाएँ
- आँत
- अग्नाशय
(iii) हृदय पेशी
- केवल हृदय में
- रेखित लेकिन अनैच्छिक
- शाखायुक्त
मानव शरीर की महत्वपूर्ण पेशियाँ
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| सबसे बड़ी पेशी | ग्लूटियस मैक्सिमस |
| सबसे लंबी पेशी | सार्टोरियस |
| सबसे छोटी पेशी | स्टेपीडियस |
| सबसे शक्तिशाली पेशी | मेस्सेटर |
| कुल पेशियाँ | लगभग 639 |
परीक्षा विशेष तथ्य
- लैक्टिक अम्ल बनने से थकान होती है।
- विश्राम के दौरान लैक्टिक अम्ल CO₂ और H₂O में टूट जाता है।
- मृत्यु के बाद शरीर का अकड़ना रिगर मॉर्टिस कहलाता है।
3. संयोजी ऊतक (Connective Tissue)
यह शरीर में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला ऊतक है।
कार्य
- परिवहन
- पोषण
- भोजन संग्रहण
- अंगों को जोड़ना
प्रकार
लचीला संयोजी ऊतक
- फाइब्रोब्लास्ट
- प्लाज्मा कोशिका
- मास्ट कोशिका
संघन संयोजी ऊतक
- कण्डरा (Tendon)
- स्नायु (Ligament)
विशिष्ट संयोजी ऊतक
- रक्त
- अस्थि
- उपास्थि
महत्वपूर्ण तथ्य
कण्डरा (Tendon)
- अस्थि को पेशी से जोड़ता है।
स्नायु (Ligament)
- अस्थि को अस्थि से जोड़ता है।
रक्त
- तरल संयोजी ऊतक
अस्थि एवं उपास्थि
- ठोस संयोजी ऊतक
4. तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)
कार्य
- उत्तेजना ग्रहण करना
- संदेशों का संचार करना
- प्रतिक्रिया उत्पन्न करना
विशेषताएँ
- तंत्रिका कोशिका को न्यूरॉन कहते हैं।
- यह शरीर की संचार इकाई है।
- तंत्रिका तंत्र का निर्माण तंत्रिका ऊतक से होता है।
CET 2026 परीक्षा हेतु सुपर रिवीजन तथ्य
✓ ऊतक शब्द – बिशैट
✓ हिस्टोलॉजी शब्द – मेयर
✓ हिस्टोलॉजी के जनक – मार्सेलो मैल्पीघी
✓ जन्तु औतिकी के जनक – बिशैट
✓ जाइलम → जल एवं खनिज परिवहन
✓ फ्लोएम → भोजन परिवहन
✓ चालनी नलिका में केन्द्रक नहीं होता
✓ सबसे बड़ी पेशी – ग्लूटियस मैक्सिमस
✓ सबसे लंबी पेशी – सार्टोरियस
✓ सबसे छोटी पेशी – स्टेपीडियस
✓ सबसे शक्तिशाली पेशी – मेस्सेटर
✓ रक्त → तरल संयोजी ऊतक
✓ अस्थि व उपास्थि → ठोस संयोजी ऊतक
✓ न्यूरॉन → तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई
ऊतक (Tissue) अध्याय जीव विज्ञान का आधारभूत एवं अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। CET Graduation Level 2026 में इस अध्याय से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाने की संभावना रहती है। यदि अभ्यर्थी पादप ऊतक एवं जन्तु ऊतक के प्रकार, कार्य, उदाहरण एवं विशेषताओं को अच्छी तरह समझ लेते हैं, तो परीक्षा में इस अध्याय से आने वाले अधिकांश प्रश्न आसानी से हल किए जा सकते हैं।
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