मध्यकालीन भारत का इतिहास - भक्ति एवं सूफी आंदोलन Part -2( रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य एवं निम्बार्काचार्य ,रामानंद, कबीरदास एवं रैदास / रविदास )

मध्यकालीन भारत का इतिहास - भक्ति एवं सूफी आंदोलन Part -2( रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य एवं निम्बार्काचार्य ,रामानंद, कबीरदास एवं रैदास / रविदास )

History of Medieval India - Bhakti and Sufi Movement Part-1 (Ramanujacharya, Madhvacharya and Nimbarkacharya, Ramanand, Kabirdas and Raidas / Ravidas)


🕉️ रामानुजाचार्य

मत / दर्शन

  • विशिष्टाद्वैतवाद
  • ‘विशिष्टाद्वैत’ का अर्थ है – ब्रह्म (ईश्वर) अद्वैत होते हुए भी जीव तथा जगत की शक्तियों द्वारा विशिष्ट है
  • भक्ति को दार्शनिक आधार प्रदान किया।

जन्म एवं जीवन

  • जन्म – 1017 ई.
  • जन्म स्थान – पेराम्बदुर (तमिलनाडु)
  • सम्प्रदाय – श्री संप्रदाय
  • प्रमुख केन्द्र – काँची एवं श्रीरंगम् (तमिलनाडु)

शिक्षा एवं गुरु

  • प्रारम्भिक गुरु – यादवप्रकाश
  • वेद एवं उपनिषदों की शिक्षा प्राप्त की
  • वास्तविक गुरु – यमुनाचार्य (अलवार संत)

विचार

  • कथन –“ज्ञान मोक्ष का साधन नहीं, मोक्ष प्राप्ति के लिए भक्ति से बढ़कर कुछ नहीं।”
  • रामानुज को ‘दक्षिण का विष्णु अवतार’ कहा जाता है।
  • सगुण भक्ति धारा के समर्थक थे।

राजनीतिक विरोध

  • चोल शासक कुलोत्तुंग (नयनार पक्ष) ने विरोध किया
  • श्रीरंगम् छोड़कर होयसल राज्य (मैसूर) चले गए
  • शासक विट्टिग (जैन) को वैष्णव बनाया
  • विट्टिग ने नाम बदलकर विष्णुवर्धन रखा

प्रमुख ग्रंथ

  1. वेदान्तसंग्रहम्
  2. श्रीभाष्यम् (ब्रह्मसूत्र पर टीका)
  3. गीताभाष्यम्
  4. वेदान्त दीपम्
  5. वेदान्तसारम्
  6. शरणागतिगद्यम्


🕉️ मध्वाचार्य

(आनन्द तीर्थ)

काल

  • 12–13वीं शताब्दी

मत / दर्शन

  • द्वैतवाद
  • आत्मा एवं परमात्मा – दो पृथक तत्त्व
  • विष्णु को ही परमात्मा माना

जन्म

  • जन्म के दो मत –

1199–1278 ई. 
1238–1317 ई.

जन्म स्थान –

  • उडूपी (दक्षिण कन्नड़ जिला, कर्नाटक)
  • पाजक गाँव, शिवल्ली के निकट

उपाधियाँ

  • पूर्णप्रज्ञ
  • आनंदतीर्थ
  • वायु का तीसरा अवतार

सामाजिक कार्य

  • यज्ञों में दी जाने वाली पशुबलि पर रोक लगाई

सम्प्रदाय

  • ब्रह्म सम्प्रदाय

प्रमुख ग्रंथ

  1. अणुभाष्यम्
  2. न्यायविवरणम्
  3. गीताभाष्यम्
  4. ऋग्भाष्यम् (ऋग्वेद के प्रथम 30 सूक्तों पर भाष्य)

दर्शन संबंधी मत

  • शंकराचार्य एवं रामानुजाचार्य – दोनों के दर्शनों का खण्डन
  • मोक्ष न पाने वाले दो वर्ग –

      1. नित्य संसारी – सांसारिक बंधन में फँसे
      2. तमोयोग्य – जिन्हें नरक जाना निश्चित है


🕉️ निम्बार्काचार्य

काल

  • 12वीं / 14वीं शताब्दी

जन्म

  • जन्म स्थान – निम्बापुर (वैलारी), तमिलनाडु
  • जाति – तैलंग ब्राह्मण

मत / दर्शन

  • द्वैताद्वैत / भेदाभेद वाद

सम्प्रदाय

  • सनक सम्प्रदाय

कार्यक्षेत्र

  • वृंदावन
  • मथुरा–ब्रज क्षेत्र में प्रमुख आश्रम

धार्मिक मान्यताएँ

  • राधा–कृष्ण की युगल पूजा
  • अवतारवाद में विश्वास
  • राधा = लक्ष्मी
  • कृष्ण = विष्णु का अवतार
  • स्वयं को “सुदर्शन चक्र का अवतार” माना जाता है

विशेषताएँ

  • दाम्पत्य भक्ति को सर्वश्रेष्ठ माना
  • राजस्थान में निम्बार्क पीठ – सलेमाबाद (अजमेर) में स्थित


🔚 सारणी : चार दार्शनिक संप्रदाय (शंकर के विरुद्ध)

आचार्यसंप्रदायदर्शन
रामानुजाचार्यश्री संप्रदायविशिष्टाद्वैत
मध्वाचार्यब्रह्म संप्रदायद्वैत
वल्लभाचार्यरुद्र संप्रदायशुद्धाद्वैत
निम्बार्काचार्यसनक संप्रदायद्वैताद्वैत


रामानंद, कबीरदास एवं रैदास / रविदास

🕉️ रामानंद

(15वीं शताब्दी)

  • हिन्दी भाषा को भक्ति का आधार बनाया।
  • भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने का श्रेय।
  • कथन – “द्रविड़ भक्ति उपजी, लायो रामानंद।”
  • दक्षिण भारत से उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन लाने का श्रेय।
  • इसलिए इन्हें उत्तर व दक्षिण भक्ति आंदोलन का रामसेतु कहा जाता है।

गुरु एवं परंपरा

  • कुछ समय तक श्री सम्प्रदाय के संत राघवानन्द के साथ रहे।
  • रामानुजाचार्य के अनुयायी थे।

जन्म

  • जन्म – इलाहाबाद (प्रयाग) में कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार में (प्रामाणिक नहीं, कुछ विद्वान दक्षिण भारत मानते हैं)।
  • पिता – पुण्यसदन
  • माता – सुशीलादेवी

विचार व कार्य

  • विष्णु के स्थान पर राम की पूजा का प्रचार।
  • सगुण भक्ति के उपदेश हिन्दी भाषा में दिए।
  • शैव एवं वैष्णव के मध्य प्रयाग में समन्वय स्थापित किया।
  • जाति प्रथा व बाह्य आडम्बरों का विरोध।
  • सभी जातियों के शिष्य बनाए।

शिष्य

  • कुल 12 शिष्य (2 महिला) –
कबीर (जुलाहा), सेन (नाई), रैदास (चमार), पीपा (राजपूत), धन्ना (जाट),
सुरसुरानंद, सुखानंद, नरहरिनंद, अनंतानंद, भावानंद, पद्मावती, सुरसरी।

अन्य तथ्य

  • इनके प्रभाव से इस्लाम स्वीकार कर चुके लोगों ने पुनः हिन्दू धर्म ग्रहण किया।
  • आनंद भाष्य में शूद्रों को वेद अध्ययन का अधिकार स्वीकार नहीं किया।
  • वैरागी संघ का गठन।
  • स्वतंत्र मत – रामावत / रामानंदी सम्प्रदाय

प्रमुख ग्रंथ

  1. वैष्णवमताब्ज भास्कर
  2. रामरक्षास्तोत्रम् टीका
  3. सिद्धान्तपटल
  4. ज्ञानलीला
  5. योग चिंतामणि
  6. सतनामपंथी


🕉️ कबीरदास

जन्म एवं परिवार

  • जन्म – 1440 ई. (1398 ई. भी मत)
  • स्थान – काशी, वरुणा–असी संगम
  • माता – अज्ञात (लोककथा अनुसार विधवा ब्राह्मण)
  • पालन-पोषण – नीरू व नीमा (जुलाहा दम्पत्ति)
  • नामकरण – कबीर (अरबी, अर्थ – महान)

गुरु एवं जीवन

  • गुरु – रामानंद
  • निर्गुण भक्ति धारा
  • संन्यास में विश्वास नहीं
  • निर्गुण संतों में गृहस्थ जीवन अपनाने वाले प्रथम
  • पत्नी – लोई
  • संतान – कमाल, कमाली

विचारधारा

  • अद्वैतवाद / एकेश्वरवाद
  • जाति-प्रथा के कटु आलोचक
  • धन-वैभव व विलासिता का विरोध
  • फक्कड़, क्रांतिकारी संत

रचनाएँ व साहित्य

  • उलटबाँसी (उलटी कही उक्तियाँ)
  • पद व दोहे (स्वतंत्र ग्रंथ नहीं)
  • संकलन – बीजक (शिष्य भागोदास द्वारा)

अन्य तथ्य

  • समकालीन शासक – बहलोल लोदी, सिकन्दर लोदी
  • अबुल फ़ज़ल ने कबीर को “मुवाहिद” कहा।
  • अंतिम समय – काशी से मगहर (उ.प्र.)
  • पद गुरुग्रंथ साहिब में संकलित
  • कबीरपंथ की स्थापना – कबीरचौरा (काशी)
  • मृत्यु के बाद गद्दी – धर्मदास
  • कबीर की छतरी – मगहर

काव्य शैलियाँ

  • साखी – दोहा शैली
  • सबद – पद शैली
  • रमैनी – दार्शनिक दोहे

अनुयायी

  • प्रमुख – मलूकदास (कड़ा, इलाहाबाद)
  • डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी –

“युगपुरुष, युगावतार, युगप्रवर्तक, वाणी का डिक्टेटर”

🕉️ रविदास (रैदास)

जन्म एवं परिवार

  • जन्म – 1398 ई., काशी
  • पिता – राहु (चमार)
  • माता – कर्मा
  • पालक दम्पत्ति – संतोकदास व कलसादेवी
  • पत्नी – लोना

गुरु

  • रामानंद
  • जानकारी का स्रोत – कबीर परचई

विचार

  • मन की पवित्रता पर बल
  • तीर्थयात्रा, व्रत, स्नान आदि का विरोध
  • मानव सेवा ही सच्चा धर्म
  • कर्म के माध्यम से मोक्ष

ऐतिहासिक संदर्भ

  • प्रवचन – सिकन्दर लोदी
  • समकालीन – बाबर, हुमायूँ, शेरशाह सूरी
  • कबीर ने रैदास को “संतों का संत” कहा

प्रभाव

  • रैदास सम्प्रदाय की स्थापना – काशी
  • चित्तौड़ की रानी झालीमीरा बाई के आध्यात्मिक गुरु



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