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History of rajasthan

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 कला एवं संस्कृति : राजस्थान की लोकदेवियां II Art and Culture: Folk Goddesses of Rajasthan





हिंगलाज माता

  • [ मुख्य पीठ लावेला (बलूचिस्तान, पाक),]
  • चांगली माई- चारण जाति की कुंवरी कन्याओं द्वारा पूजा की जाती है।

राजस्थाऩ में मंदिर

  • - नालों का अखाड़ा बीदासर (चूरू)
  • - पूरी जाति के लोग पूजा कोयलिया गुफा लोद्रवा सिवाना (बालोतरा)
  • -अराई गांव - अजमेर 
  • -लोद्र्वा - जैसलमेर
  • लोद्र्वा के भाटी शासकों की अराध्य देवी ।।
  •  गिरी जाति के लोग पूजा - महात्मा बुद्ध गिरी की गुदा - फतेहपुर (सीकर) 
  • हिंगलाज माता की शाल - जैसलमेर


ज्वाला माता 


  • - मुख्य मंदिर जोबनेर (जयपुर) - खंगारोतों की कुल देवी
  •  जोबनेर शासक जैतसिंह अजमेर के सूबेद्वार लालनेग का वाघयंत्र " नौवत" भी ज्वाला माता के मंदिर । 
  •  नरेन्द्र सिंह ने प्रवेश द्वार बनगया।


 करणी माता 

  • वास्तविक नाम - रिद्धिबाई | रिब्दु बाई
  • हिंगलाज माता का अवतार मानी जाती है । 
  • प्रतीक चिन्हः- सफेद चील
  • जन्म स्थान - सुआप (फलौदी) 
  •  माता का नाम - देवल बाई
  •  मेहा जी किनीया - पिता का नाम 
  • पति का नाम - देपा जी 
  • गुलाब कंवर- बहिन का नाम
  • तेमड राय- अराध्य देवी


* उपनाम-

  •                चूहों की देवी
  •                दाढ़ी वाली छोकरी
  •                देशनोंक री धणीयानि


करणी माता के मंदिर

  • मुख्य मंदिर - देश नोंक मंदिर (इसका निर्माण बीकानेर शासक कर्ण सिंह ने शुरू किया एवं वर्तमान स्वरूप महाराजा गंगा सिंह ने दिया )
  • इस मंदिर के दरवाजों पर अलवर शासक बख्तावर सिंह ने सोना चढवाया I
  • सफेद चूहों के दर्शन शुभ माने जाते हैं I सफेद चूहों को "कावा" कहते हैं।

  • इस मंदिर में ( सावन-भादो) नामक कढाईया रखी हैं।
- नेह जी का मंदिर - देशनोंक 
- तेमडराय़ का मंदिर- देशनोंक 
-मथानीया (जोधपुर) का मंदिर - पगल्ये की पूजा 
- उदयपुर ( करणी माता का मंदिर) - रोप वे बना हुआ है। 
- दिया तलाई ( दियात्रा - करणी माता का अंतिम समय यहीं व्यतीत हुआ )- बीकानेर

  • करणी माता अपनी बहिन गुलाब कंवर के पुत्र लखन को अपना दत्तक पुत्र बनाती हैं। 
  • करणी माता ने" राव जोधा " के मेहरानगढ. दुर्ग ( जोधपुर) की नींव रखी।
  • राव बीका ने इनके आशीर्वाद से बीकानेर की स्थापना की । 
  • पूंगल के" राव शेखावाटी" को मुल्तान की जेल से छुड़ा के लायी ।

काढयों तुर्की कैद सु, शेखा री करै शाह I 
सवाली वालो रुप सजी, पुगल दियो  पुगाय II 
  • चारण जाति की कुल देवी । 
  • बीकानेर राठौड शासकों की अराध्य/ ईष्ट देवी । 
  • देशराज मेघवाल का चबूतरा - देशनोंक । 

जीण माता 

  • जन्म स्थान - धुंध ( चूरू )
  • बचपन का नाम - जवंती बाई
  • पिता का नाम - धंधराय चौहान
  • भाई का नाम - हर्ष चौहान

मुख्य मंदिर - 

  • हर्ष की पहाड़ी(रेवासा, सीकर) 
  • निर्माता → चौहान सामंत हदृढ (1064 ई ०)
  • मेला - नवरात्रों में (चैत्र, आश्विन माह)
  • इनके मंदिर में दो दीपक ( घी व तेल) के रखे हुए हैं।
  • इनके मंदिर में पशुबलि (बकरे के कान) की दी ज़ाती है। 
  • शराब चढ़ाई जाती है। 
  • प्रतिमा - अष्ट भुजी प्रतिमा 
  • इनका गीत - चिरंजा , सबसे लम्बा एवं करुण-रस में सारंगी, डमरू वाद्य-यंत्र के साथ गाया जाता है।

उपनाम- 

  • मधुमक्खियों की देवी
  • चौहानों की अराध्य ( ईष्ट देवी )
  • मीणा जन जाति की कुल देवी । 

- जीण माता का मंदिर, तीन ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है, केवल पूर्वी ओर से खुला हुआ है।
- जीण तथा हर्ष का मिलन स्थान " कागाल पहाड़ी" हैं।
- मंदिर में पांडवों की प्रतिमा लगी हुई हैं।
- डीडवाना-कुचामन जिले के " मारोठ" में भी जीणमाता" का मंदिर है।


शीतला माता 

 मुख्य मंदिर - शील डूंगरी, चाकसू जयपुर।
इस मंदिर निर्माण सवाई माधोसिंह प्रथम ने करवाया।
बासेडा का भोग लगाया जाता है।
पुजारी - कुम्हार
सवारी - गधा

उपनाम :-
चेचक की देवी
बच्चों की संरक्षिका 
उ. भारत में महामाई
दक्षिण भारत में महाअनामा 
राजस्थान में शेडल माता

इनका मेला चैत्र कृष्णा अष्टमी (बैलगाडियों का मेला) शीलडूंगरी, चाकसू में भरता है।
एक मात्र देवी, जिनकी खंडित मूर्ति की पूजा की जाती है। 

अन्य मंदिर :-
कागा मंदिर ( जोधपुर) - . इसरा निर्माण विजय सिंह ने करवाया।
उदयपुर।

कैलादेवी

मुख्य मंदिर → त्रिकुट पर्वत , करौली ( कालीसील नदी के किनारे)
यादव जाति के जादौन वंश की कुल देवी।
माता अंजनी का अवतार मानी जाती हैं । 
मेला - चैत्र कृष्णा अष्टमी (लक्खी मेला)

प्रतिमा →
मंदिर में दो प्रतिमाएं हैं - कैला-देवी (दायीं ओर) इनका कुछ मुख टेढा है।
                              - चामुण्डा माता (बायीं ओर)
इनके भक्त लांगुरिंया कहलाते हैं , घुटकण नृत्य करते हैं।
कैलादेवी मंदिर के सामने " हनुमान मंदिर" है।
 

नारायणी माता 
मुख्य मंदिर - बैरवा की डूंगरी, राजगढ़ तहसील अलवर।
वास्तविक नाम -  करमेंती 
पति का नाम - कर्नेश सैन
मेला  - वैशाख शुक्ल एकादशी 
- नाई जाति की कुल देवी।
- मीणा जाति की अराध्य/ ईष्ट देवी । 

रानी सती

वास्तविक मंदिर - झुंझुनू 
वास्तविक नाम -  नारायणी देवी
पति का नाम  - तन धन दास ( अग्रवाल समाज की कुल देवी)
मेला  - भाद्रपद अमावस्या
हिसार के नबाब को मौत के घाट उतारा।
इत्रके परिवार में 13 महिलायें सती हुई।
उपनाम  - दादी सती
इनके मंदिर में" तलवार" की पूजा की जाती है।


आई माता 

सीरवी जाति की कुल देवी । 
वास्तविक नाम - जीजी बाई।
जन्मस्थान - अंबापुर (गुजरात)
पिता का नाम - बीका जी डाभी 
इन्हें नवदुर्गा का अवतार माना जाता है।
गुरु - रैदास ( रामदेव जी की शिष्या)
रायमल को मेवाड़ शासक बनने का आशीर्वाद दिया।
मारवाड़ शासक" राव जोधा" के समकालीन।
" माधोसिंह राठौड" को दीवान नियुक्त किया।
आई पंथ की शुरुआत व नियम बनाए।

मुख्य मंदिर :-

बिलाडा (जोधपुर)
दीपक की ज्योति से केसर टपकता है।
इनके मंदिर में गुर्जर जाति का प्रवेश वर्जित है।
वर्तमान दीवान -  गोविन्द सिंह राठौड़ 
मंदिर को" दरगाह" कहते हैं।
इनके थान को " बड़ेर" कहते हैं।


शीला देवी 

इनका मुख्य मंदिर" आमेर दुर्ग" जयपुर में हैं।
स्थानीय लोग इन्हें " सल्ला देवी' कहते हैं।
1604  ई ० में जयपुर शासक़ मानसिंह प्रथम बंगाल के शासक केदार को हराकर शीलादेवी की मूर्ति जयपुर लेकर आए।
इनकी प्रतिमा काले रंग की अष्टभुजी हैं।
प्रारंभ में इन्हें नरबलि व पशुबलि दी जाती थी , . वर्तमान में शराब व जल से अभिषेक किया जाता है।
आमेर शासकों की अराध्य/ ईष्ट देवी। 

जमुवाय माता

मुख्य मंदिर - जम्भा रामगढ़ , जयपुर।
निर्माता -  कच्छावाह शासक तेज करण / दुल्हेराय। 
आमेर शासकों की कुल देवी।
जमवा रामगढ़ में गुलाब की खेती होती है , इसलिए इसे ढूढाड. का पुष्कर कहा जाता है।

शकराय माता / शाकंभरी माता 

मुख्य मंदिर  - सांभर, जयपुर।
निर्माता  - चौहान शासक" वासुदेव " 
अन्य मंदिर - 
उदयपुरवाटी ( नीम का थाना)
सहारनपुर (उत्तरप्रदेश)
चौहानों तथा खण्डेलवालों की कुल देवी। 
अकाल के दौरान लोगों को कंदमूल , साग-सब्जियां प्रदान की, इसलिए इन्हें शकराय माता कहते हैं । 


आशापुरा माता

मुख्य मंदिर- मोदरा ( जालौर) 
                 नाडौल (पाली)
चौहानों तथा बिस्ला जाति की देवी । 
महिलायें घूंघट निकालती है एवं हाथों में मेंहदी नहीं लगाती हैं।

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