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 राजस्थान का इतिहास :- आमेर का कच्छवाहा वंश ( दुल्हेराय, काकिल देव, पृथ्वीराज, भारमल , भगवंत दास, मानसिंह , मिर्जा राजा जयसिंह) || History of Rajasthan: - Kachchwaha dynasty of Amer (Dulherai, Kakil Dev, Prithviraj, Bharmal, Bhagwant Das, Mansingh, Mirza Raja Jai ​​Singh)





राजस्थान के इतिहास के ब्लॉग सीरीज हमने बीकानेर तथा मारवाड़ के राठौड़ वंश , मेवाड़ के गुहिल व सिसोदिया वंश , अजमेर तथा रणथंभौर के चौहान वंश एवम् जालौर के सोनगरा चौहान वंश को पूर्ण कर लिया है , आज के ब्लॉग में हम आमेर के कच्छवाहा वंश के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।


आमेर का कच्छवाहा वंश 

आमेर का इतिहास

  • आमेर के कच्छवाहा स्वयं को भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज मानते हैं।
  • कुश के वंशज होने के कारण ये कुशवाहा कहलाए।
  • आमेर के शासक स्वयं को श्री राम के वंशज मानते हैं , इसलिए इन्हें रघुवंश तिलक कहा जाता है ।


नोट :- गुर्जर प्रतिहारों को रघुकुल तिलक कहा जाता है ।

  • कुशवाहा शब्द अपभ्रंश होते हुए धीरे धीरे कच्छवाहा हो गया ।
  • आमेर वंश के प्रथम शासक दुल्हेराय ( वास्तविक नाम - तेजकरण) था ।

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दूल्हेराय 

  • वास्तिवक नाम - तेजकरण 
  • मध्यप्रदेश के नरवर के रहने वाले 
  • सर्वप्रथम 1137 ईस्वी में दौसा के बडगुर्जरों को हराया ,दौसा को अपनी राजधानी बनाया ।
  • रामगढ़ में जमुवाय माता का मंदिर बनवाया ।
  • कच्छवाहा वंश की कुलदेवी जमुवाय माता है ।


काकिल देव

  • इन्होंने 1207 में आमेर के मीनाओ को हराकर आमेर पर " कच्छवाहा वंश " की नींव रखी व आमेर के अपनी राजधानी बनाया।
  • आमेर का प्राचीन नाम - अंबिकापुर ।
  • अंबिकेश्वर मंदिर का निर्माण करवाया।


पृथ्वीराज 

  • इनके कुल 12 पुत्र थे ।
  • इन्होंने आमेर को अपने 12 पुत्रों के लिए 12 कोटदियों में विभाजित किया ।
  • इनके पुत्र सांगा, भूमि विवाद में मारे गए  बाद में इन्हे भोमिया महाराज के रूप में पूजा जाने लगा।
  • इनके पुत्र सांगा के नाम से सांगानेर का नाम पड़ा ।


भारमल ( 1547 - 1573 ईस्वी )

  • राजस्थान में मुगलों की अधीनता स्वीकार करने वाला वंश कच्छवाहा वंश, तथा सबसे पहले 1562 ईस्वी में भारमल ने सांभर में मुगल बादशाह अकबर की अधीनता स्वीकार की ।
  • इन्होंने अपनी पुत्री हरका बाई की शादी अकबर से की।
  • हरकाबाई की उपाधि - मरियम उज्जबानी 
  • हराकाबाई और अकबर का पुत्र - सलीम 
  • राजस्थान में सर्वप्रथम मुगल वैवाहिक संबंध और मुगल अधीनता स्वीकार करने वाला राजा भारमल था ।

भगवंत दास ( 1573 - 1589 ईस्वी )

बूंदी के साथ संधि 

  • 1569 ईस्वी में अकबर के रणथंभौर अभियान के दौरान बूंदी के सुरजन हाड़ा की मुगलों के साथ संधि की ।
  • इसमें मानसिंह की भी भूमिका रही ।

सरनाल विद्रोह ( गुजरात )

  • गुजरात में अकबर के कहने पर सरनाल विद्रोह को दबाया ।
  • अकबर ने खुश होकर भगवंत दास को नगाड़ा और परचम भेंट किया ।


  • अकबर के कहने पर अपनी मान बाई की शादी सहजादे सलीम से की।
  • मानबाई की उपाधि - शाहे बेगम
  • मानबाई और जहांगीर ( सलीम ) का पुत्र - खुसरो।
  • कहा जाता है की जहांगीर की शराब की आदतों से परेशान होकर मानबाई ने आत्महत्या की ।
  • अकबर ने सितंबर 1573 ईस्वी में भगवंतदास जी को महाराणा प्रताप के पास तीसरे शिष्टमंडल के रुप में वार्ता करने भेजा ।
  • अकबर ने 7 वर्ष तक भगवंतदास को पंजाब का सूबेदार बनाया।


मानसिंह (1589 - 1614 ईस्वी )

  • जन्म :- 1550 ईस्वी
  • जून 1573 में महाराणा प्रताप के पास अकबर द्वारा भेजे गए दूसरे शिष्टमंडल का हिस्सा थे ।
  • 1589 ईस्वी में अकबर ने इन्हे 5000 मनसबदारी दी।
  • 1605 ईस्वी में अकबर ने मानसिंह की मनसबदारी 5000 से बढ़ाकर 7000 कर दी ।
  • जहांगीर ने मानसिंह की मनसबदारी को घटाकर 5000 कर दिया था ।
  • हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप के विरुद्ध अकबर का सेनापति के रूप में साथ दिया ।

काबुल अभियान ( 1581 - 1586 ईस्वी )

  • काबुल के 5 कबीलों को हराया , इसी के उपलक्ष में आमेर के झंडा का रंग पचरंगा कर दिया ।
  • आमेर में इससे पहले झाडशाही ( श्री राम का प्रतीक) झंडा प्रचलन में था ।
  • झाडशाही शब्द का संबंध हमेशा आमेर से रहा है 

  झाडशाही झंडा 

  झाडशाही झरना 

  झाडशाही सिक्के 

बिहार अभियान ( 1587 ईस्वी )

  • जगह जिला के शासक अनंतचेरु को हराया ।
  • बिहार में मानसिंह नगर बसाया।
  • गया में महादेव मन्दिर बनवाया।
  • वैंकटपुर में भवानी शंकर मंदिर बनाया ।
  • रोहिताशगढ़ दुर्ग बनवाया।
  • उड़ीसा के नासिर खां और कतलू खा ( 1592 ईस्वी ) में हराया ।
  • पूरी के जगन्नाथ मंदिर पर नियंत्रण किया ।


बंगाल अभियान ( 1594 ईस्वी )

  • पूर्वी बंगाल के राजा केदार को हराकर शिलामाता की मूर्ति जयपुर लेकर आए और आमेर में मंदिर बनवाया।
  • बंगाल में अकबर नगर ( वर्तमान में राजमहल) बसाया।


मानसिंह के निर्माण कार्य 

  • वृंदावन में राधा गोविंद मंदिर बनवाया।
  • आमेर दुर्ग का निर्माण करवाया ।
  • इनकी रानी कनकावती ने जगत शिरोमणि मंदिर का निर्माण करवाया , इस मंदिर की श्री कृष्ण की मूर्ति मानसिंह चित्तौड़गढ़ के मीरा मंदिर से लाए थे ।
  • जयपुर में हनुमान मंदिर बनवाया।


मानसिंह के दरबारी विद्वान और उनकी रचनाएं 

पुंडरीक विट्ठल             

  • राग माला 
  • राग मंजरी 
  • राग चंद्रोदय 
  • नृतन निर्णय 
  • दुनी प्रकाश 


राय मुरारी दान 

  • मान प्रकाश 


जगन्नाथ 

  • मानसिंह कीर्ति मुक्तावली 


मानसिंह की उपाधियां 

  • मिर्ज़ा राजा 
  • फरजंद ( इसका अर्थ होता है - बेटा ) 1605 ईस्वी में अकबर ने दी ।


भावसिंह ( 1614 - 1621 )

  • शराब की लत के कारण मृत्यु हो गई ।


मिर्जा राजा जयसिंह ( 1621- 1667 ईस्वी )

  • आमेर के शासकों में सबसे लंबा लगभग 46 वर्ष का शासनकाल रहा ।
  • जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब के साथ रहने वाला शासक।

जहांगीर और मिर्जा राजा जयसिंह 

  • 1622 ईस्वी में अहमदनगर (महाराष्ट्र) मलिक अंबर के विद्रोह का दमन।
  • 1629 ईस्वी में उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत में उज्जबेगों का दमन किया ।
  • 1630 ईस्वी में खान ए जहां लोदी को हराया।


शाहजहां और मिर्जा राजा जयसिंह 

  • 1636 ईस्वी में बीजापुर गोलकुंडा अभियान पर गए।
  • 1637 ईस्वी में शाहजहां ने इन्हे मिर्जा राजा की उपाधि दी ।
  • कंधार अभियान पर गए ।


मुगल उत्तराधिकार संघर्ष 

  • इन्होंने मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा अपने चारों पुत्र दारा शिकोह , शुजा, औरंगजेब , मुराद में से दारा शिकोह को बादशाह घोषित कर दिया , इसके बाद इनके चारों पुत्रों के मध्य उत्तराधिकार संघर्ष प्रारंभ हुआ ।

बहादुरपुर का युद्ध (1658 ईस्वी )

  • यह युद्ध दारा शिकोह और शूजा के मध्य लड़ा गया , दारा शिकोह का साथ मिर्ज़ा राजा जयसिंह ने दिया 
  • इस युद्ध में मिर्जा राजा की जीत हुई ।


  • सामुगढ़ के युद्ध के पश्चात् मिर्जा राजा जयसिंह ने औरंगजेब के साथ संधि कर ली ।

दौराई का युद्ध ( 1659 ईस्वी )

  • दारा शिकोह तथा औरंगजेब के मध्य लड़ा गया , इस युद्ध में औरंगजेब का साथ मिर्ज़ा राजा जयसिंह ने दिया ।
  • इस युद्ध में औरंगजेब की जीत हुई ।


औरंगजेब के समय अभियान 

  • औरंगजेब ने इन्हे वीर छत्रपति शिवाजी जी महाराज के खिलाफ भेजा गया ।

पुरंदर की संधि 1665 ईस्वी 

  •  इन्होंने औरंगजेब और छत्रपति शिवाजी जी महाराज के मध्य 1665 ईस्वी में औरंगजेब का प्रतिनिधि बनकर पुरंदर की संधि की ।


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मिर्जा राजा जयसिंह के दरबारी कवि तथा उनकी रचनाएं 

बिहारी जी 

  • बिहारी सतसई 

कुलपति मिश्र 

  • इन्होंने कुल 52 पुस्तकें लिखीं, जिनमें मिर्जा राजा जयसिंह के दक्षिण भारत अभियानों का वर्णन मिलता है ।

राय कवि 

  • जयसिंह चरित्र 


मिर्जा राजा जयसिंह के निर्माण कार्य 

  • दक्षिण भारत में जयसिंहपुरा बसाया।
  • जयपुर में जयगढ दुर्ग का निर्माण करवाया।


  • मिर्जा राजा जयसिंह की मृत्यु बुरहानपुर, अफगानिस्तान में हुई ।
  • जयसिंह की मृत्यु के बाद रामसिंह राजा बने ।
  • तत्पचात विष्णुसिंह राजा बने।
  • विष्णुसिंह के बाद इनके पुत्र सवाई जयसिंह राजा बने।



आज के ब्लॉग में हमने कच्छवाहा वंश के संस्थापक से लेकर मिर्जा राजा जयसिंह तक के महत्त्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध करवाई हैं , अगर आपको हमारे ब्लॉग्स पसंद आ रहे हैं तो अपने दोस्तों के साथ इसे साझा करें तथा हमारे व्हाट्सएप चैनल व टेलीग्राम ग्रुप को जॉइन करें ।


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