राजस्थान प्रजामण्डल आंदोलन: इतिहास, प्रमुख प्रजामण्डल, शहीद, महिला शक्ति और 60 MCQ Quiz
राजस्थान प्रजामण्डल आंदोलन: इतिहास, प्रमुख प्रजामण्डल, शहीद, महिला शक्ति और 60 MCQ Quiz
RPSC RAS, SI, CET, पटवारी और अन्य राजस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए संपूर्ण अध्ययन नोट्स: राजस्थान के प्रजामण्डल आंदोलन की पृष्ठभूमि, उद्देश्य, अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद, 19 प्रमुख प्रजामण्डल, प्रमुख शहीद, जन-जागरण साहित्य, महिला कार्यकर्ताओं का योगदान और अंत में 60 अभ्यास MCQ एक ही लेख में।
राजस्थान प्रजामण्डल आंदोलन क्या था?
क्या आप जानते हैं कि आजादी से पहले राजस्थान की देशी रियासतों में जनता पर दोहरी गुलामी का बोझ था—एक तरफ ब्रिटिश हुकूमत का प्रभाव और दूसरी तरफ स्थानीय राजाओं, जागीरदारों तथा सामंती व्यवस्था की समस्याएँ? इसी राजनीतिक और सामाजिक परिस्थिति में रियासती जनता ने अपने अधिकारों, नागरिक स्वतंत्रताओं और उत्तरदायी शासन की मांग को लेकर संगठित आंदोलन खड़े किए। इन्हीं आंदोलनों को व्यापक रूप से प्रजामण्डल आंदोलन के रूप में जाना जाता है।
‘प्रजा’ अर्थात जनता और ‘मण्डल’ अर्थात संगठन। इस दृष्टि से प्रजामण्डल रियासतों की जनता के राजनीतिक संगठनों के रूप में विकसित हुए। इनका लक्ष्य केवल विरोध करना नहीं था, बल्कि जनता को राजनीतिक रूप से जागरूक करना और शासन को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाने की मांग उठाना भी था।
प्रजामण्डल आंदोलन की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
तत्कालीन राजपूताना अनेक देशी रियासतों, ठिकानों और अजमेर-मेरवाड़ा जैसे ब्रिटिश प्रशासन वाले क्षेत्र में विभाजित था। अध्ययन सामग्री के अनुसार जनता बेगार, अत्यधिक करों और जागीरदारी-सामंती शोषण जैसी समस्याओं से प्रभावित थी। इसी पृष्ठभूमि में राजनीतिक चेतना का विस्तार हुआ।
अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद की भूमिका
- 1927: बंबई में अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद (All India States Peoples' Conference—AISPC) का गठन।
- 1928: अजमेर में राजपूताना देशी राज्य लोक परिषद की स्थापना।
- अध्ययन सामग्री के अनुसार इसका प्रथम अधिवेशन 1931 में अजमेर में रामनारायण चौधरी की अध्यक्षता में हुआ।
1938 का हरिपुरा कांग्रेस अधिवेशन
1938 में गुजरात के हरिपुरा में कांग्रेस अधिवेशन हुआ जिसकी अध्यक्षता सुभाष चंद्र बोस ने की। अध्ययन सामग्री में इसे देशी रियासतों के आंदोलनों को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने वाला निर्णायक मोड़ बताया गया है। इसके बाद विभिन्न रियासतों में प्रजामण्डल गतिविधियों को व्यापक राजनीतिक समर्थन मिला।
राजस्थान के 19 प्रमुख प्रजामण्डल: वर्ष, संस्थापक और विशेष तथ्य
| क्रम | प्रजामण्डल | वर्ष | प्रमुख व्यक्ति/स्थापना | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|---|
| 1 | जयपुर | 1931 | कर्पूरचन्द पाटनी, जमनालाल बजाज | राजस्थान का प्रथम प्रजामण्डल; 1936-37 में पुनर्गठन |
| 2 | मारवाड़ | 1934 | भंवरलाल सर्राफ, जयनारायण व्यास | बालमुकुंद बिस्सा का बलिदान |
| 3 | बीकानेर | 1936 | वैद्य मघाराम, लक्ष्मणदास स्वामी | कलकत्ता में स्थापना; रायसिंहनगर कांड |
| 4 | मेवाड़ | 1938 | माणिक्य लाल वर्मा; प्रथम अध्यक्ष बलवंत सिंह मेहता | सराड़ा किला; 1941 प्रथम अधिवेशन |
| 5 | शाहपुरा | 1938 | लादूराम व्यास, रमेशचंद्र ओझा, अभयसिंह डांगी | प्रथम उत्तरदायी शासन वाली रियासत के रूप में उल्लेख |
| 6 | बूंदी | 1931 | कांतिलाल | 1944 में बूंदी राज्य लोक परिषद |
| 7 | हाड़ौती/कोटा | 1934/1939 | पं. नयनूराम शर्मा, हाजी फैज़ मोहम्मद; बाद में अभिन्न हरि | कोटा प्रजामण्डल का पुनर्गठन 1939 |
| 8 | धौलपुर | 1936 | कृष्णदत्त पालीवाल, ज्वाला प्रसाद जिज्ञासु | 1947 तसीमो कांड |
| 9 | अलवर | 1938 | हरिनारायण शर्मा, कुंजबिहारी मोदी | रियासती जन-जागरण |
| 10 | भरतपुर | 1938 | गोपीलाल यादव, किशनलाल जोशी | रेवाड़ी में स्थापना |
| 11 | करौली | 1938 | त्रिलोकचंद माथुर, चिरंजीलाल शर्मा, कुंवर मदन सिंह | करौली क्षेत्र में राजनीतिक चेतना |
| 12 | सिरोही | 1939 | गोकुलभाई भट्ट | ‘राजस्थान का गांधी’ |
| 13 | किशनगढ़ | 1939 | कांतिलाल चौथानी, जमाल शाह | रियासती जन-संगठन |
| 14 | कुशलगढ़ | 1942 | भंवरलाल निगम | बाद के चरण का प्रजामण्डल |
| 15 | बांसवाड़ा | 1943 | भूपेंद्रनाथ त्रिवेदी, धूलजी भाई भावसार | विजया बहन भावसार का महिला जन-जागरण |
| 16 | डूंगरपुर | 1944 | भोगीलाल पंड्या | ‘वागड़ का गांधी’ |
| 17 | जैसलमेर | 1945 | मीठालाल व्यास | जोधपुर में स्थापना; सागरमल गोपा से संबंधित आंदोलन |
| 18 | प्रतापगढ़ | 1945 | चुन्नीलाल, अमृतलाल | अंतिम चरण के प्रजामण्डलों में शामिल |
| 19 | झालावाड़ | 1946 | मांगीलाल भव्य | अध्ययन सामग्री में राजस्थान का अंतिम प्रजामण्डल |
जयपुर प्रजामण्डल और जेंटलमैन एग्रीमेंट
जयपुर प्रजामण्डल की स्थापना 1931 में कर्पूरचन्द पाटनी और जमनालाल बजाज से जोड़ी गई है। 1936-37 में इसका पुनर्गठन हुआ। प्रमुख नेताओं में हीरालाल शास्त्री और चिरंजीलाल मिश्र का उल्लेख मिलता है। 8-9 मई 1938 को नथमल का कटला में प्रथम अधिवेशन हुआ तथा 10 मई को कस्तूरबा गांधी ने महिलाओं की सभा को संबोधित किया।
17 सितंबर 1942 का जेंटलमैन एग्रीमेंट हीरालाल शास्त्री और जयपुर के दीवान मिर्जा इस्माइल के बीच हुआ। अध्ययन सामग्री के अनुसार इसके तहत प्रजामण्डल ने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग न लेने का वचन दिया। इससे असंतुष्ट होकर बाबा हरिश्चंद्र, रामकरण जोशी और दौलतराम भंडारी आदि ने आज़ाद मोर्चा बनाया। 1945 में नेहरूजी की सलाह पर इसके पुनः जयपुर प्रजामण्डल में विलय का उल्लेख है।
मारवाड़ प्रजामण्डल और बालमुकुंद बिस्सा
मारवाड़ प्रजामण्डल की स्थापना 1934 में भंवरलाल सर्राफ और जयनारायण व्यास से संबंधित बताई गई है। 1938 में रणछोड़दास गट्टानी की अध्यक्षता में मारवाड़ लोक परिषद गठित हुई। बालमुकुंद बिस्सा ने जून 1942 में जेल में भूख हड़ताल के दौरान प्राण त्यागे। उन्हें अध्ययन सामग्री में ‘राजस्थान का जतिन दास’ कहा गया है।
बीकानेर प्रजामण्डल और रायसिंहनगर कांड
बीकानेर प्रजामण्डल की स्थापना 4 अक्टूबर 1936 को कलकत्ता में वैद्य मघाराम और लक्ष्मणदास स्वामी से संबंधित बताई गई है। 1942 में बाबू रघुवर दयाल गोयल द्वारा बीकानेर राज्य परिषद की स्थापना का उल्लेख है।
1 जुलाई 1946 के रायसिंहनगर कांड में प्रजामण्डल के जुलूस पर पुलिस फायरिंग के दौरान बीरबल हरिजन शहीद हुए।
मेवाड़ प्रजामण्डल और सराड़ा किला
मेवाड़ प्रजामण्डल की स्थापना 24 अप्रैल 1938 को बलवंत सिंह मेहता के निवास ‘साहित्य कुटीर’ पर बताई गई है। संस्थापक के रूप में माणिक्य लाल वर्मा, प्रथम अध्यक्ष के रूप में बलवंत सिंह मेहता और उपाध्यक्ष के रूप में भूरेलाल बया का उल्लेख है।
सराड़ा किला को ‘मेवाड़ का काला पानी’ कहा गया है और अध्ययन सामग्री के अनुसार भूरेलाल बया को यहां नजरबंद रखा गया था। 1941 में प्रथम अधिवेशन उदयपुर की शाहपुरा हवेली में माणिक्य लाल वर्मा की अध्यक्षता में हुआ। इसका उद्घाटन आचार्य जे.बी. कृपलानी ने किया और विजयलक्ष्मी पंडित ने भाग लिया।
शाहपुरा: उत्तरदायी शासन का महत्वपूर्ण पड़ाव
शाहपुरा प्रजामण्डल की स्थापना 18 अप्रैल 1938 को लादूराम व्यास, रमेशचंद्र ओझा और अभयसिंह डांगी से संबंधित बताई गई है। अध्ययन सामग्री के अनुसार शाहपुरा पहली रियासत थी जिसने राजा सुदर्शन देव के नेतृत्व में पूर्ण उत्तरदायी शासन स्थापित किया और गोकुललाल असावा को प्रधानमंत्री बनाया।
प्रमुख शहादत और घटनाएँ
सागरमल गोपा
जैसलमेर में राजशाही अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठाने वाले सागरमल गोपा को जेल में यातनाएँ दी गईं। अध्ययन सामग्री के अनुसार 3 अप्रैल 1946 को जेल में मिट्टी का तेल छिड़ककर उन्हें जला दिया गया।
रायसिंहनगर कांड
1 जुलाई 1946, बीकानेर क्षेत्र। बीरबल हरिजन तिरंगा फहराते हुए शहीद हुए।
तसीमो कांड
11 अप्रैल 1947, धौलपुर। तिरंगा फहराने के प्रयास के दौरान पंचम सिंह और छत्तर सिंह परमार शहीद हुए।
प्रजामण्डल आंदोलन में साहित्य और समाचार पत्रों की भूमिका
| रचना/साहित्य | संबंधित व्यक्ति | मुख्य संदर्भ |
|---|---|---|
| मेवाड़ का वर्तमान शासक | माणिक्य लाल वर्मा | मेवाड़ की रियासती व्यवस्था की आलोचना |
| नादिर शाही | विजय सिंह मेहता | बीकानेर से संबंधित जन-जागरण साहित्य |
| बीकानेर एक दिग्दर्शन | राजनीतिक कार्यकर्ता | बीकानेर की स्थिति को सामने रखने वाला ज्ञापन |
| जैसलमेर में गुंडाराज | सागरमल गोपा | जैसलमेर की रियासती व्यवस्था की आलोचना |
| आज़ादी के दीवाने | सागरमल गोपा | जन-जागरण |
| रघुनाथ सिंह का मुकदमा | सागरमल गोपा | राजनीतिक जागरण |
| पोपाबाई की पोल | जयनारायण व्यास | मारवाड़ जन-जागरण |
| मारवाड़ की दशा | जयनारायण व्यास | मारवाड़ की स्थिति |
| पंछीड़ा | माणिक्य लाल वर्मा | कार्यकर्ताओं में उत्साह और जन-जागरण |
महिला शक्ति का योगदान
- नारायणी देवी वर्मा: माणिक्य लाल वर्मा की पत्नी; पुत्री के साथ आंदोलन में भाग लेने पर 1940 में जेल गईं।
- अंजना देवी चौधरी: रामनारायण चौधरी की पत्नी; अध्ययन सामग्री में राजस्थान की पहली गिरफ्तार महिला के रूप में उल्लेखित।
- किशोरी देवी: 25 अप्रैल 1934 को सीकर के कटराथल में लगभग 10,000 जाट महिलाओं के सम्मेलन का नेतृत्व।
- रमा देवी, सुशीला भगवंत और विजया बहन भावसार: महिला मंडलों और जन-जागरण से जुड़ी प्रमुख कार्यकर्ता।
प्रजामण्डल आंदोलन और आधुनिक राजस्थान का नेतृत्व
जयपुर प्रजामण्डल; एकीकृत राजस्थान के प्रथम मनोनीत मुख्यमंत्री के रूप में उल्लेख।
मेवाड़ प्रजामण्डल; संयुक्त राजस्थान के प्रधानमंत्री के रूप में उल्लेख।
मारवाड़ लोक परिषद; राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में उल्लेख।
मेवाड़ के युवा नेता; राजस्थान के दीर्घकालिक मुख्यमंत्री के रूप में उल्लेख।
परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्मार्ट ट्रिक्स
- पहला और अंतिम: “जय शुरू, झाला खत्म” — जयपुर 1931, झालावाड़ 1946।
- पहला उत्तरदायी शासन: शाहपुरा।
- राजस्थान का गांधी: गोकुलभाई भट्ट।
- वागड़ का गांधी: भोगीलाल पंड्या।
- राजस्थान का नेहरू: जुगल किशोर चतुर्वेदी।
- शेर-ए-राजस्थान: जयनारायण व्यास।
- रियासत से बाहर बने प्रजामण्डल: बीकानेर—कलकत्ता, भरतपुर—रेवाड़ी, जैसलमेर—जोधपुर।
- सराड़ा किला: मेवाड़ का काला पानी — भूरेलाल बया।
- रायसिंहनगर: बीरबल हरिजन।
- तसीमो: पंचम सिंह और छत्तर सिंह परमार।
📚 राजस्थान प्रजामण्डल आंदोलन क्विज
आपने राजस्थान के प्रजामण्डल आंदोलन से जुड़े कितने प्रश्न सही किए? अपने स्कोर की जांच करें और इस क्विज को RPSC RAS, SI, CET, पटवारी और अन्य राजस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के साथ साझा करें।
💡 सुझाव: पहले बिना उत्तरमाला देखे सभी प्रश्न हल करें, फिर अंत में अपने उत्तरों का मिलान करें।
प्रजामण्डल आंदोलन: 60 प्रश्नों का ऑनलाइन MCQ Quiz
नीचे दिए गए प्रश्न अभ्यास हेतु हैं। पहले सभी प्रश्न हल करें और फिर “परिणाम देखें” पर क्लिक करें।
1. ‘प्रजामण्डल’ शब्द का सही अर्थ क्या है?
2. प्रजामण्डल आंदोलनों का प्रमुख राजनीतिक उद्देश्य क्या था?
3. अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद की स्थापना किस वर्ष हुई?
4. अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद की स्थापना कहाँ हुई?
5. राजपूताना देशी राज्य लोक परिषद की स्थापना किस वर्ष हुई?
6. 1938 के हरिपुरा कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की?
7. राजस्थान का प्रथम प्रजामण्डल किसे माना गया है?
8. जयपुर प्रजामण्डल की स्थापना किस वर्ष हुई?
9. जयपुर प्रजामण्डल की स्थापना से किनका नाम जुड़ा है?
10. जयपुर प्रजामण्डल का 1936-37 में क्या हुआ?
11. जयपुर प्रजामण्डल का प्रथम अधिवेशन कब हुआ?
12. जयपुर प्रजामण्डल का प्रथम अधिवेशन कहाँ हुआ?
13. 10 मई 1938 को महिलाओं की सभा को किसने संबोधित किया?
14. जेंटलमैन एग्रीमेंट का संबंध किस प्रजामण्डल से था?
15. जयपुर का जेंटलमैन एग्रीमेंट किस वर्ष हुआ?
16. जेंटलमैन एग्रीमेंट में किनकी प्रमुख भूमिका थी?
17. आज़ाद मोर्चा का गठन किस घटना के विरोध में हुआ?
18. आज़ाद मोर्चा से कौन जुड़े थे?
19. मारवाड़ प्रजामण्डल की स्थापना किस वर्ष हुई?
20. मारवाड़ प्रजामण्डल से किन नेताओं का संबंध था?
21. शेर-ए-राजस्थान की उपाधि किससे संबंधित है?
22. बालमुकुंद बिस्सा किस आंदोलन से संबंधित थे?
23. बालमुकुंद बिस्सा को किस उपनाम से जाना जाता है?
24. बीकानेर प्रजामण्डल की स्थापना कहाँ हुई?
25. बीकानेर प्रजामण्डल की स्थापना किस वर्ष हुई?
26. बीकानेर प्रजामण्डल की स्थापना से कौन जुड़े थे?
27. रायसिंहनगर कांड कब हुआ?
28. रायसिंहनगर कांड में कौन शहीद हुए?
29. मेवाड़ प्रजामण्डल की स्थापना कब हुई?
30. मेवाड़ प्रजामण्डल के संस्थापक के रूप में किसका नाम दिया गया है?
31. मेवाड़ प्रजामण्डल के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
32. सराड़ा का किला किस नाम से प्रसिद्ध था?
33. सराड़ा के किले में किसे नजरबंद रखा गया था?
34. मेवाड़ प्रजामण्डल के प्रथम अधिवेशन का आयोजन किस वर्ष हुआ?
35. मेवाड़ प्रजामण्डल के प्रथम अधिवेशन का उद्घाटन किसने किया?
36. मेवाड़ में 1945-46 के AISPC अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की?
37. शाहपुरा प्रजामण्डल की स्थापना किस वर्ष हुई?
38. राजपूताना की पहली रियासत के रूप में किसे उत्तरदायी शासन स्थापित करने से जोड़ा गया है?
39. शाहपुरा में प्रधानमंत्री के रूप में किसे बनाया गया?
40. धौलपुर प्रजामण्डल से कौन संबंधित थे?
41. तसीमो कांड कब हुआ?
42. तसीमो कांड में शहीद होने वाले प्रमुख व्यक्तियों का सही युग्म कौन-सा है?
43. राजस्थान का गांधी किसे कहा जाता है?
44. वागड़ का गांधी किसे कहा जाता है?
45. राजस्थान का नेहरू किसे कहा गया है?
46. जैसलमेर में गुंडाराज किससे संबंधित है?
47. मेवाड़ का वर्तमान शासक किससे संबंधित रचना है?
48. पोपाबाई की पोल के लेखक के रूप में किसका नाम दिया गया है?
49. पंछीड़ा गीत किससे संबंधित है?
50. कटराथल का ऐतिहासिक महिला सम्मेलन किससे संबंधित है?
51. कटराथल सम्मेलन में लगभग कितनी महिलाओं की भागीदारी बताई गई है?
52. प्रजामण्डल आंदोलन में गिरफ्तार होने वाली राजस्थान की पहली महिला के रूप में किसका उल्लेख किया गया है?
53. नारायणी देवी वर्मा का संबंध किस प्रजामण्डल से था?
54. एकीकृत राजस्थान के प्रथम मनोनीत मुख्यमंत्री के रूप में किसका उल्लेख है?
55. निम्न में से कौन-सा क्रम अध्ययन सामग्री के अनुसार सही है?
56. निम्न कथनों में सही विकल्प चुनें: 1. जयपुर 1931; 2. शाहपुरा प्रथम उत्तरदायी शासन; 3. झालावाड़ अंतिम प्रजामण्डल
57. निम्न में से कौन-सा युग्म गलत है?
58. कौन-से प्रजामण्डल अपनी मूल रियासत से बाहर स्थापित किए गए थे?
59. सही मिलान चुनें: रायसिंहनगर—बीरबल हरिजन; तसीमो—पंचम सिंह; सराड़ा—भूरेलाल बया
60. प्रजामण्डल आंदोलन के उद्देश्य को सबसे सटीक रूप से कौन व्यक्त करता है?
उत्तरमाला
1-B, 2-C, 3-B, 4-C, 5-B, 6-C, 7-B, 8-B, 9-B, 10-C, 11-A, 12-B, 13-C, 14-B, 15-C, 16-A, 17-B, 18-D, 19-B, 20-A, 21-B, 22-C, 23-B, 24-C, 25-B, 26-A, 27-A, 28-C, 29-B, 30-A, 31-B, 32-B, 33-A, 34-C, 35-B, 36-B, 37-B, 38-C, 39-A, 40-C, 41-C, 42-B, 43-B, 44-B, 45-A, 46-B, 47-A, 48-B, 49-B, 50-A, 51-C, 52-C, 53-A, 54-A, 55-A, 56-D, 57-D, 58-D, 59-A, 60-C
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
राजस्थान का प्रथम प्रजामण्डल कौन-सा था?
उपलब्ध अध्ययन सामग्री के अनुसार जयपुर प्रजामण्डल (1931) को राजस्थान का प्रथम प्रजामण्डल बताया गया है।
प्रजामण्डल आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
मुख्य उद्देश्य रियासतों में जनता के प्रति उत्तरदायी और प्रतिनिधि शासन की स्थापना तथा राजनीतिक अधिकारों के लिए जन-जागरण था।
राजस्थान की पहली उत्तरदायी शासन वाली रियासत कौन-सी थी?
उपलब्ध अध्ययन सामग्री में शाहपुरा को पहली रियासत बताया गया है जिसने पूर्ण उत्तरदायी शासन स्थापित किया।
‘राजस्थान का गांधी’ किसे कहा जाता है?
गोकुलभाई भट्ट को ‘राजस्थान का गांधी’ कहा गया है।
‘वागड़ का गांधी’ किसे कहा जाता है?
भोगीलाल पंड्या को ‘वागड़ का गांधी’ कहा गया है।
रायसिंहनगर कांड में कौन शहीद हुए?
बीरबल हरिजन रायसिंहनगर कांड में शहीद हुए थे।
तसीमो कांड में कौन शहीद हुए?
अध्ययन सामग्री के अनुसार पंचम सिंह और छत्तर सिंह परमार तसीमो कांड में शहीद हुए।
सराड़ा किला किस नाम से प्रसिद्ध था?
सराड़ा किले को ‘मेवाड़ का काला पानी’ कहा गया है।
