CET Graduation 2026: सिंधु घाटी सभ्यता: नगर योजना, प्रमुख स्थल और CET
इतिहास | CET Graduation 2026
सिंधु घाटी सभ्यता: नगर योजना, प्रमुख स्थल और CET के जरूरी तथ्य
अपडेट: 25 अगस्त 2026 | पढ़ने का समय: लगभग 10 मिनट
सिंधु या हड़प्पा सभ्यता भारतीय उपमहाद्वीप की पहली विकसित नगरीय सभ्यताओं में गिनी जाती है। CET में इसके प्रमुख स्थल, खोजकर्ता, नगर-योजना, अर्थव्यवस्था, मुहरों, लिपि और विशिष्ट पुरावशेषों पर तथ्यात्मक तथा मिलान-आधारित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
सिंधु घाटी सभ्यता का परिचय और काल
हड़प्पा सभ्यता का विस्तार वर्तमान भारत और पाकिस्तान के बड़े भूभाग में था। इसका नाम सबसे पहले पहचाने गए प्रमुख स्थल हड़प्पा के आधार पर पड़ा। इसका परिपक्व नगरीय चरण सामान्यतः लगभग 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व माना जाता है। यह कांस्य युगीन सभ्यता थी; लोहे का सामान्य उपयोग इसकी विशेषता नहीं था।
- हड़प्पा: दयाराम साहनी के निर्देशन में 1921 में उत्खनन शुरू हुआ।
- मोहनजोदड़ो: राखालदास बनर्जी ने 1922 में इस स्थल की पहचान/खुदाई से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य किया।
- मुख्य धातुएँ: तांबा और कांसा; सोना-चाँदी भी ज्ञात थे।
- मुख्य विशेषता: योजनाबद्ध नगर, जल-निकासी, मानकीकृत ईंटें और व्यापक व्यापार।
हड़प्पाई नगर योजना की प्रमुख विशेषताएँ
हड़प्पाई नगरों की सबसे महत्वपूर्ण पहचान उनकी सुव्यवस्थित नगर-योजना थी। अनेक नगरों में सड़कें एक-दूसरे को लगभग समकोण पर काटती थीं। घरों और सार्वजनिक भवनों में पकी ईंटों का प्रयोग हुआ तथा गंदे पानी की निकासी के लिए नालियों का जाल बनाया गया।
- दुर्ग और निचला नगर: कई नगरों में ऊँचे भाग पर दुर्ग क्षेत्र तथा अलग निचला आवासीय नगर दिखाई देता है।
- जल-निकासी: घरों की छोटी नालियाँ मुख्य सड़क की ढकी नालियों से जुड़ती थीं। सफाई के लिए निरीक्षण छिद्र या सोख्ता जैसी व्यवस्थाएँ भी मिलती हैं।
- मानकीकृत ईंटें: अनेक स्थलों पर ईंटों का अनुपात लगभग 1:2:4 पाया गया है।
- कुएँ और स्नानघर: घरों में स्नान-स्थल और कई नगरों में कुओं की व्यवस्था विकसित जल-प्रबंधन को दिखाती है।
- अनाज भंडारण व सार्वजनिक संरचनाएँ: कुछ स्थलों पर बड़े भवन और भंडारण से जुड़ी संरचनाएँ मिली हैं, हालांकि उनके उपयोग की व्याख्या में विद्वानों के मत अलग हो सकते हैं।
सिंधु सभ्यता के प्रमुख स्थल और CET के जरूरी तथ्य
1. महान स्नानागार—मोहनजोदड़ो
मोहनजोदड़ो का महान स्नानागार पकी ईंटों से निर्मित प्रसिद्ध सार्वजनिक जल-संरचना है। इसे सामान्यतः सामूहिक या अनुष्ठानिक स्नान से जोड़ा जाता है। जलरोधक बनाने के लिए बिटुमेन के उपयोग का उल्लेख भी किया जाता है।
2. लोथल—गोदी जैसी संरचना और समुद्री व्यापार
लोथल गुजरात में स्थित है। यहाँ मिली विशाल आयताकार संरचना को सामान्यतः गोदी या डॉकयार्ड के रूप में पहचाना जाता है। मनका-निर्माण, व्यापारिक गतिविधियों और समुद्री संपर्क के कारण यह परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
3. कालीबंगा—राजस्थान और जुते हुए खेत का प्रमाण
कालीबंगा राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी के किनारे स्थित है। यहाँ जुते हुए खेत के निशान और अग्निवेदिका जैसी संरचनाएँ मिली हैं। राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं में यह स्थल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
4. धौलावीरा—जल प्रबंधन और विशिष्ट नगर विन्यास
धौलावीरा गुजरात के कच्छ क्षेत्र में स्थित है। यह जलाशयों, बाँधनुमा संरचनाओं, जल-संग्रह व्यवस्था, बहुखंडी नगर-विन्यास और बड़े हड़प्पाई संकेत-पट्ट से जुड़ा है। यहाँ पत्थर का व्यापक उपयोग भी उल्लेखनीय है।
5. हड़प्पा—रावी नदी के निकट प्रमुख स्थल
हड़प्पा वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में रावी नदी के पुराने प्रवाह के निकट स्थित है। इसी स्थल के नाम पर पूरी सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता कहा गया। यहाँ कब्रिस्तान, मुहरें, अन्नागार मानी गई संरचनाएँ और अनेक पुरावशेष मिले हैं।
6. मोहनजोदड़ो—मृतकों का टीला
मोहनजोदड़ो वर्तमान पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में सिंधु नदी के निकट है। महान स्नानागार के अतिरिक्त कांस्य की नृत्य करती युवती, दाढ़ी वाले पुरुष की प्रस्तर प्रतिमा और पशुपति कही जाने वाली मुहर जैसे प्रसिद्ध पुरावशेष इससे जुड़े हैं।
अर्थव्यवस्था, मुहरें, लिपि और तकनीक
मुहरें
अधिकांश हड़प्पाई मुहरें सेलखड़ी से बनी थीं। उन पर पशु आकृतियाँ और छोटे अभिलेख मिलते हैं। एक-सींग वाला काल्पनिक पशु मुहरों पर बार-बार दिखाई देता है। मुहरों को व्यापार, पहचान या माल पर छाप लगाने से जोड़ा जाता है।
हड़प्पाई लिपि
हड़प्पाई लिपि आज तक निर्णायक रूप से पढ़ी नहीं जा सकी है। अभिलेख सामान्यतः छोटे हैं। अनेक उदाहरणों में लेखन की दिशा दाएँ से बाएँ मानी जाती है, लेकिन लिपि की भाषा और निश्चित अर्थ अभी विवादित हैं।
बाट और माप
व्यापार में मानकीकृत पत्थर के बाट प्रयोग किए जाते थे। छोटे बाटों में द्विआधारी क्रम जैसी नियमितता दिखाई देती है। यह विस्तृत व्यापारिक व्यवस्था और प्रशासनिक मानकीकरण का संकेत देता है।
कृषि और व्यापार
गेहूँ, जौ, दालों, तिल और कपास की खेती के प्रमाण मिलते हैं। मेसोपोटामिया के अभिलेखों में उल्लिखित मेलुहा को कई इतिहासकार हड़प्पाई क्षेत्र से जोड़ते हैं। मनके, शंख, धातु और अन्य वस्तुओं का आंतरिक तथा बाहरी व्यापार होता था।
पकी ईंट और लौह
पकी ईंटें नगर निर्माण और जल-निकासी की प्रमुख सामग्री थीं। हड़प्पा सभ्यता कांस्य युगीन थी; इसलिए लौह का सामान्य उपयोग नहीं इसकी एक महत्वपूर्ण नकारात्मक पहचान है। परीक्षा में “कौन-सी धातु ज्ञात नहीं थी?” जैसे प्रश्न में प्रायः उत्तर लौह होता है।
एक नजर में पुनरावृत्ति
| शब्द/स्थल | सही संबंध |
|---|---|
| महान स्नानागार | मोहनजोदड़ो की प्रसिद्ध सार्वजनिक जल-संरचना |
| लोथल | गुजरात; गोदी जैसी संरचना और मनका उद्योग |
| कालीबंगा | राजस्थान; जुते खेत और अग्निवेदिका के प्रमाण |
| धौलावीरा | कच्छ; जल-संग्रह और विशिष्ट नगर-विन्यास |
| हड़प्पा | रावी के निकट; सभ्यता का नाम इसी स्थल पर |
| मुहरें | सेलखड़ी; पशु आकृतियाँ और छोटे अभिलेख |
| लिपि | अब तक अपठित चिह्न-प्रणाली |
| बाट-माप | मानकीकृत व्यापारिक प्रणाली |
| पकी ईंट | नगर और नालियों के निर्माण की प्रमुख सामग्री |
| लौह | हड़प्पाई संस्कृति में सामान्यतः अनुपस्थित |
याद रखने की ट्रिक: “मो–स्नान, लो–गोदी, काली–खेत, धौला–जल” यानी मोहनजोदड़ो–महान स्नानागार, लोथल–गोदी, कालीबंगा–जुता खेत और धौलावीरा–जल प्रबंधन।
CET अभ्यास: 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
महान स्नानागार किस स्थल से मिला है?
A. हड़प्पा B. मोहनजोदड़ो C. लोथल D. कालीबंगाउत्तर देखें
उत्तर: B—मोहनजोदड़ो।
गोदी जैसी संरचना के लिए प्रसिद्ध हड़प्पाई स्थल कौन-सा है?
A. बनावली B. रोपड़ C. लोथल D. राखीगढ़ीउत्तर देखें
उत्तर: C—लोथल।
जुते हुए खेत का प्रमाण कहाँ मिला?
A. धौलावीरा B. कालीबंगा C. मोहनजोदड़ो D. चन्हूदड़ोउत्तर देखें
उत्तर: B—कालीबंगा।
विशाल जलाशयों और जल-संग्रह व्यवस्था के लिए कौन-सा स्थल प्रसिद्ध है?
A. हड़प्पा B. लोथल C. आलमगीरपुर D. धौलावीराउत्तर देखें
उत्तर: D—धौलावीरा।
हड़प्पा सभ्यता का परिपक्व चरण सामान्यतः किस अवधि में माना जाता है?
A. 2600–1900 ईसा पूर्व B. 1500–600 ईसा पूर्व C. 600–300 ईसा पूर्व D. 3200–2500 ईस्वीउत्तर देखें
उत्तर: A—लगभग 2600–1900 ईसा पूर्व।
हड़प्पाई लिपि के बारे में सही कथन कौन-सा है?
A. यह पूरी तरह पढ़ी जा चुकी है B. यह केवल संस्कृत में है C. यह अब तक अपठित है D. यह देवनागरी लिपि हैउत्तर देखें
उत्तर: C—यह अब तक निर्णायक रूप से पढ़ी नहीं गई है।
हड़प्पाई मुहरें प्रायः किस पदार्थ की बनी थीं?
A. सेलखड़ी B. लौह C. काँच D. संगमरमरउत्तर देखें
उत्तर: A—सेलखड़ी।
निम्न में से कौन-सी धातु हड़प्पाई संस्कृति में सामान्यतः अनुपस्थित थी?
A. तांबा B. कांसा C. सोना D. लौहउत्तर देखें
उत्तर: D—लौह।
कालीबंगा वर्तमान में किस राज्य में स्थित है?
A. गुजरात B. राजस्थान C. हरियाणा D. पंजाबउत्तर देखें
उत्तर: B—राजस्थान।
हड़प्पाई नगर योजना की प्रमुख विशेषता क्या थी?
A. अनियमित गलियाँ B. केवल लकड़ी के मकान C. योजनाबद्ध सड़कें और जल-निकासी D. लौह के विशाल कारखानेउत्तर देखें
उत्तर: C—योजनाबद्ध सड़कें और विकसित जल-निकासी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या सिंधु घाटी सभ्यता CET Graduation के लिए उपयोगी है?
हाँ। प्राचीन भारतीय इतिहास के अंतर्गत इसके प्रमुख स्थल, पुरातात्विक प्रमाण, नगर-योजना और सांस्कृतिक विशेषताएँ महत्वपूर्ण हैं। परीक्षा से पहले नवीनतम RSSB सिलेबस से विषयों का मिलान अवश्य करें।
इसे जल्दी कैसे दोहराएँ?
पहले स्थल–विशेषता तालिका याद करें, फिर बिना उत्तर देखे 10 MCQ हल करें। जिन तथ्यों में गलती हो, उनकी अलग एक-पृष्ठ सूची बनाएँ।
क्या केवल ये तथ्य पर्याप्त हैं?
यह लेख मजबूत आधार और त्वरित पुनरावृत्ति देता है। गहन अध्ययन के लिए संबंधित NCERT अध्याय, मानचित्र और RSSB के पुराने प्रश्नपत्र भी पढ़ें।
